मनरेगा के नाम पर साइबर ठगी का जाल: फर्जी सिम फैक्ट्री का पर्दाफाश, चार शातिर गिरफ्तार, 73 सिम जब्त

जसवंत नगर: सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की आड़ में ग्रामीणों को ठगने वाले साइबर ठगी गिरोह पर पुलिस ने करारी चोट की है. पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) सत्यापन अभियान के दौरान मिली ठोस जानकारी के आधार पर पुलिस ने संगठित साइबर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार शातिर अभियुक्तों को दबोच लिया. आरोपियों के कब्जे से 73 फर्जी सिम कार्ड बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था.
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह ग्राम कुरसेना और हनुमंत खेड़ा क्षेत्र में भोले-भाले ग्रामीणों को मनरेगा योजना का लालच देकर उनके खातों में चार-चार हजार रुपये आने का झांसा देता था. इसके लिए नया सिम कार्ड लेने की शर्त रखी जाती थी. इसी बहाने गिरोह के सदस्य आधार कार्ड की प्रतियां, फोटो और अंगूठे के निशान हासिल कर लेते थे. इन दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से एनएसडीएल पेमेंट बैंक में खाते खुलवाए जाते और फिर उन्हीं खातों व सिम कार्डों के जरिए साइबर ठगी का खेल खेला जाता था.
मंगलवार सुबह थाना अध्यक्ष कमल भाटी को सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध लोग सिम देने के नाम पर ग्रामीणों से दस्तावेज तो ले रहे हैं, लेकिन सिम उपलब्ध नहीं करा रहे.
सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और ग्राम हनुमंत खेड़ा निवासी शिशुपाल सिंह उर्फ अनिल को धर दबोचा. पूछताछ में उसने पूरे गिरोह की पोल खोल दी. पुलिस के अनुसार अनिल ही इस साइबर ठगी नेटवर्क का मास्टरमाइंड है. अनिल की निशानदेही पर पुलिस ने हिमांशु, विमलेश कुमार और संजीव कुमार राठौर को भी गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में फर्जी सिम कार्ड बरामद किए गए हैं. पुलिस का दावा है कि इस गिरोह के तार मुंबई और पुणे जैसे महानगरों तक फैले हुए हैं और तीन अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं.
क्षेत्राधिकारी आयुषी सिंह ने बताया कि साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे पीओएस सत्यापन अभियान के तहत यह बड़ी सफलता मिली है. इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक यशवीर सिंह तोमर, कृष्ण कुमार, अवनीश कुमार सहित पुलिस टीम की अहम भूमिका रही. पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि सरकारी योजनाओं के नाम पर ठगी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे गिरोहों पर लगातार सख्त कार्रवाई जारी.











