रायगढ़-सारंगढ़ में घना कोहरा, लाइट जलाकर चले वाहन:उत्तरी हिस्से में कड़ाके की ठंड, बच्चों की सेहत पर पड़ रहा असर; स्किन-हाइपोथर्मिया के मरीज बढ़े

छत्तीसगढ़ में अगले पांच दिनों तक न्यूनतम तापमान में कोई विदेश परिवर्तन होने की संभावना नहीं है। इस समय प्रदेश में सबसे ज्यादा ठंड उत्तरी हिस्से में पड़ रही है। अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 6 डिग्री तक पहुंच गया है। यहां ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गईं और हर तरफ बर्फ की चादर बिछी नजर आई।

रामघाट, माई की बगिया, श्रीयंत्र मंदिर के पास भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। रायगढ़ और सारंगढ़ जिलों के कई इलाकों में देर-रात से घना कोहरा छाने लगा, जिसका असर सुबह 8 बजे तक रहता है। लाइट जलाकर वाहन चलाना पड़ रहा है।

वहीं पिछले 24 घंटों में प्रदेश में सबसे अधिक तापमान 29.4 डिग्री सेल्सियस जगदलपुर में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया।

कड़ाके की ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ रहा है। बीते एक महीने में अंबेडकर समेत निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।

क्यों ज्यादा बीमार पड़ रहे बच्चे?

बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में जल्दी ठंडा होता है। नवजातों की मांसपेशियां कम विकसित होती हैं, जिससे वे ठंड सहन नहीं कर पाते। वहीं, सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा और बढ़ जाता है।

NICU और SNCU तक पहुंच रहे मामले

डॉक्टरों के अनुसार, पर्याप्त सावधानी नहीं बरतने पर बच्चों को एनआईसीयू (NICU) और एसएनसीयू (SNCU) में भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। नवजात का शरीर अचानक ठंडा पड़ जाना या तापमान सामान्य से कम हो जाना हाइपोथर्मिया का प्रमुख लक्षण है।

दिन-रात के तापमान में बड़ा अंतर बना कारण

रायपुर में गुरुवार को न्यूनतम तापमान 12.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.8 डिग्री कम है। वहीं अधिकतम तापमान 28.6 डिग्री रहा। दिन और रात के तापमान में करीब 17 डिग्री का अंतर लोगों को बीमार कर रहा है। इसका असर सिर्फ बच्चों पर ही नहीं, बल्कि युवा और बुजुर्गों पर भी दिखने लगा है।

OPD में मरीजों की भीड़

ठंड के चलते अस्पतालों की ओपीडी में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अंबेडकर अस्पताल में मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग में 600 से ज्यादा मरीज सामने आए हैं। रोजाना 2000 से अधिक मरीजों का इलाज ओपीडी में किया जा रहा है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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