औरंगाबाद में आशा कार्यकर्ताओं का उग्र प्रदर्शन, सिविल सर्जन कार्यालय का घेराव

औरंगाबाद : बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ (सीटू) के बैनर तले बिहार राज्य आशा एवं आशा फैसिलिटेटर संघ के द्वारा 10 ट्रेड यूनियन के आह्वान पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गुरुवार को आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया गया.शहर के गांधी मैदान से निकलकर यह आक्रोश मार्च मुख्य बाजार होते हुए सदर अस्पताल पहुंची जहां सिविल सर्जन के कार्यालय का घेराव किया गया और सरकार की उदासीनता को लेकर जमकर नारेबाजी की गई। ट्रेड यूनियन का मुख्य मुद्दा केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड को समाप्त करना था.
इस विरोध का असर व्यापक दिखा जहां सैकड़ों की संख्या में आशा, आशा फैसिलिटेटर के साथ साथ ममता एवं कुरियर शामिल रहे.इस दौरान विभिन्न संगठनों से जुड़े हजारों कार्यकर्ता हाथों में तख्ती और बैनर लेकर सड़कों पर उतरे और केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की.
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि चार लेबर कोड मजदूर और कर्मचारी विरोधी हैं.क्योंकि इस नए कानून के लागू होने से मजदूरों से 8 घंटे के बजाय 12 घंटे तक काम लिया जा सकेगा और कई कल्याणकारी प्रावधान समाप्त हो जाएंगे.साथ ही मृत्यु की स्थिति में मिलने वाली सहायता राशि भी सीमित कर दी जाएगी.
ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि विगत छह माह से आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि बंद है.राज स्वास्थ्य समिति के द्वारा आवंटित 57 कार्यों के अलावा अन्य कई कार्य जैसे शराब बंदी, गृह कलह रोकना, किसानों का निबंध, आयुष्मान कार्ड बनवाना जैसे अन्य कई काम आशा कार्यकर्ताओं से लिया जा रहा है.इस बात से राज्य सरकार, विश्व स्वास्थ्य संगठन, उच्च न्यायालय सभी सहमत है कि आशा स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ है। इसके बावजूद विगत 6 माह से प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबित रखना मजदूर विरोधी कार्य है.
मुख्यमंत्री बिहार के द्वारा 2000 रुपये बढ़ी हुई पारितोषिक राशि का एक माह, कहीं-कहीं दो माह खाता में गया है.लेकिन यह अभी सभी आशा के खाता में उपलब्ध नहीं हो सका है। प्रदर्शनकारियों की मांगों में आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को श्रम नियमों के अधीन लाया जाए, आशा कार्यकर्ताओं का छह माह से बकाये प्रोत्साहन राशि का एकमुश्त भुगतान अभिलंब किया जाए, पे आईडी के नाम पर की जा रही घूसखोरी पर रोक लगाई जाए तथा वर्ष 2023 के बाद नवचयनित आशा को प्रोत्साहन राशि का भुगतान अभिलंब करना सुनिश्चित किया जाए, आशा एवं आशा फैसिलिटेटर कार्यकर्ताओं की सेवा नियुक्ति की उम्र आंगनबाड़ी सेविका सहायिका की तरह 65 वर्ष किया जाए,
सभी आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को प्रोत्साहन राशि के बजाय 26000 रुपया प्रत्येक माह वेतन का भुगतान करते हुए पेंशन, ग्रेच्युटी, पीएफ, ईएसआई एवं अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधा, 45 वें एवं 46 वें श्रम सम्मेलन के अनुशंसा के आलोक में लागू किया जाए, इसके लिए अगले केंद्रीय बजट में पर्याप्त बजट की व्यवस्था की जाए, सभी आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को तृतीय वर्ग के कर्मचारियों के रूप में सेवा नियमित किया जाए,
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को स्थाई योजना में तब्दील करते हुए राज्य के स्वास्थ्य समितियां के बकाया केंद्रीय राशि का विलंब व्यवस्था किया जाए, ताकि आशा फैसिलिटेटर के बकाया एवं अन्य राशि का भुगतान हो सके, पूरे देश की आशा के लिए एक समान की कार्य स्थिति करते हुए सभी को एएनएम के पद पर प्रोन्नत किया जाए, 6 माह का वैतनिक मातृका अवकाश, 20 दिन का आकस्मिक अवकाश/मेडिकल लीव सभी आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को उपलब्ध कराया जाए,
आवश्यकता आधारभूत संरचना विकसित करते हुए वास्तविक यात्रा भत्ता, अच्छा मोबाइल/फोन/टैबलेट/डाटा पैक/ नेटवर्क सभी आशा कार्यकर्ताओं को उपलब्ध किया जाए, निजीकरण पर रोक लगाते हुए स्वास्थ्य पर जीडीपी का 6% बजट उपलब्ध कराया जाए, आशा के विभागीय कार्य बोझ को देखते हुए फार्मर रजिस्ट्रीकरण कार्य से मुक्त किया जाए आदि शामिल है.
इसके अलावा ममता एवं कुरियर संघ के सदस्यों ने भी अपनी मांगों को रखते हुए सरकार से निवेदन किया कि उन्हें भी सम्मान पूर्वक जीवन जीने का हक है ऐसे में सरकार उनके हितों को ध्यान में रखते हुए मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करते हुए उनकी भी मांगों पर विचार करे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.









