इंदौर पश्चिमी रिंग रोड पर हाई कोर्ट में सुनवाई टली, अब 16 फरवरी को होगी अहम सुनवाई

पीथमपुर से शिप्रा के बीच प्रस्तावित पश्चिमी बायपास (रिंग रोड) परियोजना को लेकर दायर 70 से अधिक याचिकाओं पर निर्धारित सुनवाई नियमित पीठ के नहीं बैठने के कारण टल गई। अब इस मामले में 16 फरवरी को नियमित पीठ के समक्ष सुनवाई होगी।
64 किलोमीटर लंबे इस पश्चिमी बायपास को केंद्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मंजूरी दी है। यह मार्ग पीथमपुर से शुरू होकर काली बिल्लौद, यशवंत सागर के आगे से उज्जैन रोड और वहां से शिप्रा होते हुए एबी रोड तक प्रस्तावित है। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की जा चुकी है, जिसमें नेचुरल वैली नामक वैध आवासीय कॉलोनी भी शामिल है।
जिला प्रशासन ने संबंधित भूमि को कृषि भूमि मानते हुए अवार्ड की तैयारी कर ली थी। कॉलोनी के प्लॉटधारकों का आरोप है कि उन्हें न तो नोटिस दिया गया और न ही उनका पक्ष सुना गया। महंगे दाम पर प्लॉट खरीदने वाले रहवासियों ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई चल रही है।
प्लॉटधारकों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता का कहना है कि कॉलोनी को विधिवत विभिन्न विभागों से अनुमति प्राप्त है, इसके बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जमीन को कृषि भूमि मान रहा है। आपत्तियां दर्ज कराने के बाद भी सुनवाई नहीं होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
दूसरी ओर प्राधिकरण का कहना है कि नई अधिसूचना जारी होने के बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया वैध है। इससे पहले कोर्ट अंतिम अवार्ड पारित करने पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दे चुका है।
पश्चिमी रिंग रोड परियोजना में इंदौर और धार जिलों की भूमि शामिल है। इंदौर जिले की तीन तहसील और धार जिले की एक तहसील इस दायरे में आती हैं। केंद्र सरकार ने इस परियोजना के तहत लगभग एक हजार करोड़ रुपये मुआवजे की राशि तय की है, जिसमें इंदौर जिले के लिए 795 करोड़ और धार जिले के लिए 200 करोड़ रुपये निर्धारित हैं। इंदौर जिले के करीब 998 किसानों की जमीन इस परियोजना की जद में आ रही है।











