सरकार को जनता की बात सुननी चाहिए, राजघाट पर बोले सोनम वांगचुक, अब घर लौटेंगे

नीट पेपर लीक के मुद्दे पर अनशन पर बैठने वाले एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक मेंदांता अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए हैं। गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के तुरंत बाद वह राजघाट पहुंचे। यहां बापू को श्रद्धांजलि देने के बाद वह अपने लद्दाख के लिए रवाना होंगे। राजघाट में उन्होंने कहा कि बापू का रास्ता आज भी प्रासंगिक है। शांति से अपनी बात कहकर सरकार को झुकाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता की बात सुननी चाहिए। इस दौरान उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई एक्शन नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पैलेट गन के मुद्दे पर भी बात होनी चाहिए।
पेपर लीक के मुद्दे पर सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक अनशन किया था। सरकार ने सोनम वांगचुक की सभी मांगें मान ली थी जिसके बाद सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई को देर रात अपना अनशन खत्म कर दिया था। सोनम वांगचुक ने अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के हाथों अपना अनशन खुलवाया था। अब वह अस्पताल से बाहर आ चुके हैं और अपने घर जाएंगे।
कहां जाएंगे सोनम वांगचुक?
सामने आई जानकारी के अनुसार, सोनम वांगचुक अस्पताल से डिस्चार्ज होकर सीधे राजघाट के लिए निकल गए, जहां उन्होंने महात्मा गांधी को नमन किया। सोनम वांगचुक 28 जून को अनशन शुरू करने से पहले भी यहां गए थे। उन्होंने छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने से पहले यहां आकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी थी। बूख हड़ताल सफल होने के बाद भी उन्होंने पत्नी गीतांजलि के साथ महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।
महात्मा गांधी का रास्ता आज भी प्रासंगिक- सोनम वांगचुक
राजघाट पर श्रद्धांजलि देने के बाद सोनम वांगचुक ने कहा, “26 दिन के इस अनशन और आंदोलन के खत्म होने के बाद, मैं सबसे पहले राजघाट आकर महात्मा गांधी को याद करना चाहता था, उनका शुक्रिया अदा करना चाहता था और देश को बताना चाहता था कि उन्होंने जो रास्ता दिखाया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक और सही है, जितना सौ साल पहले था। पिछले पांच या छह सालों से, हम लद्दाख में इस गांधीवादी तरीके को अपना रहे हैं और इसे बहुत सही और रेलिवेंट पा रहे हैं। फिर भी, मुझे पक्का नहीं था कि यह नेशनल लेवल पर काम करेगा या नहीं। इस बार, मुझे यह देखकर तसल्ली हुई कि यह सौ साल बाद भी नेशनल लेवल पर रेलिवेंट है और शायद आने वाले सौ या हजार साल तक भी ऐसा ही रहेगा। इसीलिए मैं भारत और दुनिया के लोगों से अपील करता हूं कि वे बापू के दिखाए शांति के रास्ते से अपनी शिकायतें और अपीलें बताएं। हल जरूर मिलेगा। इसमें समय लग सकता है, लेकिन इसका अंत अंधेरे में नहीं होता। हमने खुद यह देखा है। हो सकता है कि पहली कोशिश में कामयाबी न मिले, लेकिन आमतौर पर मिल ही जाती है।”
अस्पताल ने क्या बताया?
गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल ने कहा, “सोनम वांगचुक, जिन्हें 21.07.2026 को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उन्हें आज छुट्टी दे दी गई है। मेदांता की समन्वित मल्टी-स्पेशियलिटी देखभाल के स्टैंडर्ड के अनुसार, उनका इलाज इंटरनल मेडिसिन, क्रिटिकल केयर और संबंधित स्पेशियलिटीज को मिलाकर बनाए गए एक इंटीग्रेटेड प्रोटोकॉल के तहत किया गया। छुट्टी के समय, उनकी हालत स्थिर थी और वे पूरी तरह होश में थे। उनके वाइटल साइन्स (जैसे ब्लड प्रेशर, पल्स आदि) नॉर्मल रेंज में थे। उन्हें आउटपेशेंट के तौर पर रूटीन फ़ॉलो-अप की सलाह दी गई है।”
26 दिनों तक अनशन पर रहे सोनम
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक 28 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन में शामिल हुए थे। वह 26 दिनों तक अनशन पर रहे। इस दौरान 18 जुलाई को सोनम को पुलिस ने जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवा दिया। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद सोनम को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 24 जुलाई को सोनम ने अपना अनशन तोड़ा। सोनम ने कहा था कि कई शर्तों पर लंबी बातचीत और देश में संभावित हिंसा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ये कदम उठाया है।
CJP का प्रदर्शन खत्म
कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चला आंदोलन बीते शनिवार को खत्म हो गया है। यह विरोध प्रदर्शन 20 जून को शुरू हुआ था। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस पर सोनम वांगचुक ने अपने ट्वीट में लिखा- “यह लोकतंत्र की जीत है – सीधी लोकतंत्र की जीत, जो सीधे सड़कों से आई है। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। CJP और देश की Gen Z को बधाई।”











