MLC देवेश कुमार ने कैसे दिया इस्तीफा:आलाकमान का फोन या स्टेट लीडरशिप का दबाव, भाजपा ने दीपक प्रकाश का मंत्री पद क्यों बचाया

RLM (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश बिहार सरकार में पंचायती राज विभाग के मंत्री बने रहेंगे। उनके पद पर मंडरा रहा खतरा भाजपा MLC रहे देवेश कुमार के इस्तीफा के साथ टल गया है।
उपेंद्र कुशवाहा की दबाव की राजनीति काम आई। सुप्रीम कोर्ट ने दीपक के मंत्री बने रहने पर सवाल उठाए तो भाजपा ने बड़ा फैसला लिया। सूत्रों के अनुसार दिल्ली आलाकमान से सीधे मैसेज आया कि देवेश इस्तीफा देंगे। उनकी जगह दीपक विधान परिषद जाएंगे। इस फैसले के पीछे स्टेट लीडरशिप का दबाव भी था।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM के चार विधायक चुने गए। इनमें से एक उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा हैं। बाकी के तीन विधायकों के टूटने की कई बार चर्चा हुई। भाजपा की ओर से पार्टी के विलय का दबाव बनाया गया, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा तैयार नहीं हुए।
- कुशवाहा जानते थे कि किसी भी सदन का सदस्य नहीं होने के चलते उनके बेटे का मंत्री पद जा सकता है। इसके बाद भी बेटे से इस्तीफा नहीं दिलाया।
- उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि दीपक प्रकाश दो-चार महीने के लिए नहीं, बल्कि 2030 तक पूरे कार्यकाल के लिए मंत्री बने हैं। वह सिर्फ हमारी पार्टी की मर्जी से नहीं NDA की सहमति से बने हैं।
- बिना किसी सदन का सदस्य बने मंत्री रहने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो दीपक प्रकाश ने कहा, ‘सरकार जवाब देगी। संविधान के प्रावधानों और NDA के नेताओं के आशीर्वाद से मंत्री पद पर हूं।’
- सीनियर जर्नलिस्ट इंद्रभूषण बताते हैं कि कुशवाहा जानते हैं कि बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए लव-कुश (कुर्मी-कोइरी/कुशवाहा) समीकरण भाजपा के लिए कितना अहम है।
- इस प्रेशर पॉलिटिक्स का असर दिखा कि भाजपा आला कमान ने अपने एक MLC से इस्तीफा दिलाकर दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने और उनका मंत्री पद बचाने का रास्ता साफ किया। दिल्ली से फोन आने के बाद देवेश ने शुक्रवार को सभापति अवधेश नारायण सिंह को इस्तीफा सौंप दिया। इस फैसले के लिए बिहार भाजपा के बड़े नेताओं का दबाव भी था।
2. अब देवेश कुमार का क्या होगा?
इस्तीफा क्यों दे रहे हैं? आगे क्या जिम्मेदारी मिलेगी? इन सवालों पर देवेश कुमार ने मीडिया से कहा कि मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूं। पार्टी नेतृत्व का हर फैसला मंजूर है। पार्टी आगे जो जिम्मेदारी देगी उसे निभाऊंगा।
भाजपा सूत्रों के अनुसार देवेश कुमार को संगठन में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।
3. क्या देवेश कुमार का कद छोटा हुआ है?
देवेश कुमार ने अभी MLC पद से इस्तीफा दिया है। उनका कद वर्तमान से छोटा हुआ है या नहीं, यह पक्के तौर पर अगली जिम्मेदारी मिलने के बाद कह सकते हैं।
- एक सच्चाई यह है कि जब से बिहार भाजपा संगठन की जिम्मेदारी सम्राट चौधरी के हाथ में आई उनका कद घटा है। संजय जायसवाल के प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान वह प्रदेश महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर थे।
- देवेश केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय के गुट के माने जाते हैं। वह पत्रकार रहे हैं। राजनीति में उनकी एंट्री भाजपा के दिवंगत नेता अरुण जेटली ने कराई थी। जेटली ने उन्हें बिहार भेजा था।
- जनवरी 2024 में नीतीश कुमार दूसरी बार महागठबंधन छोड़कर NDA में आए और सरकार बनाई तब देवेश कुमार भूमिहार कोटे से मंत्री पद की रेस में थे। मार्च 2023 में सम्राट चौधरी बिहार भाजपा अध्यक्ष बने। उन्होंने अपनी नई टीम बनाई तो संगठन के पद से देवेश कुमार की छुट्टी कर दी थी।
- दिल्ली भाजपा में देवेश कुमार की अच्छी पकड़ है। वह समस्तीपुर के पूसा प्रखंड के मोहम्मदपुर देवपाट गांव के जमींदार परिवार से आते हैं। उनके दादा यमुना कारजी स्वतंत्रता सेनानी, प्रमुख किसान नेता और पत्रकार थे। पटना में इनकी काफी अचल संपत्ति है।
4. क्या अब 5 साल मंत्री बने रह पाएंगे दीपक प्रकाश?
भाजपा ने देवेश कुमार से इस्तीफा दिलाकर दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर आए संकट को फिलहाल टाल दिया है, लेकिन वह पूरे 5 साल पद पर बने रहेंगे, यह अभी भी तय नहीं।
देवेश कुमार 17 मार्च 2021 को राज्यपाल मनोनीत कोटे से MLC बने थे। अगले साल मार्च तक उनका कार्यकाल था। अब उनकी जगह दीपक प्रकाश विधान परिषद जाते हैं तो उनका कार्यकाल भी मार्च 2027 तक ही रहेगा। मतलब, 8 महीने बाद एक बार फिर उन्हें विधानसभा या विधान परिषद जाने की व्यवस्था देखनी होगी या मंत्री पद खतरे में पड़ जाएगा।











