मोजो मशरूम, बिस्किट फैक्ट्री में मानवाधिकार आयोग का छापा:दो फैक्ट्रियों में 68 लड़कियों समेत 109 बाल मजदूर काम करते मिले

राजधानी रायपुर के सड्डू और खरोरा स्थित दो फैक्ट्रियों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सोमवार दोपहर छापेमारी की। इस दौरान 68 लड़कियां और 41 लड़के काम करते हुए मिले। इनमें अधिकांश मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के रहने वाले हैं। एनएचआरसी का दावा है कि सभी नाबालिग हैं, जो बाल श्रम कानून का गंभीर उल्लंघन है।

मजदूरों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। सभी को रेस्क्यू कर प्रशासन को सौंप दिया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने इन सभी को अलग-अलग इलाकों के सेंटर में रखा है। छापे के दौरान जिला प्रशासन, पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग और श्रम विभाग की टीम भी साथ थी।

जांच तक दोनों फैक्ट्रियां रहेंगी बंद मोजो फैक्ट्री में जुलाई में छापा पड़ा था। उस समय नाबालिगों से जबरन मजदूरी करवाने और वेतन नहीं देने की शिकायतें सामने आई थीं। पुलिस ने 91 मजदूरों को छुड़वाकर उनके घर भेज दिया था, लेकिन आज तक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। यह फैक्ट्री एक बड़े नेता से जुड़ी बताई जाती है। वहीं बिस्कुट फैक्ट्री के खिलाफ भी शिकायतें मिली थीं। एनएचआरसी ने दोनों फैक्ट्रियों को तत्काल बंद करने के निर्देश दिए हैं।

जुलाई में पड़ा था छापा, खबरों पर NHRC ने लिया स्वत: संज्ञान

दरअसल, जुलाई में प्रशासन और पुलिस ने मोजो फैक्ट्री में छापा मारा था। उस दौरान 97 मजदूरों को रेस्क्यू किया गया था। तब सामने आया था श्रमिकों से मारपीट की जाती है। समय पर मजदूरी का भुगतान भी नहीं किया जाता। मामला सामने आने के बाद श्रम विभाग की टीम ने सभी मजदूरों को बकाया दिलाकर उनके घर भेज दिया था।

इसके बाद श्रम विभाग और पुलिस ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। मामले में कोई एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई। इधर, मीडिया में प्रकाशित खबरों को एनएचआरसी ने स्वत: संज्ञान लिया और इसकी प्रारंभिक जांच शुरू कर दी। पिछले तीन महीनों की जांच के बाद सोमवार को एनएचआरसी की टीम खरोरा की मशरूम फैक्ट्री और सड्डू की बिस्कुट फैक्ट्री में गई।

यहां पहुंचने के बाद एनएचआरसी की टीम ने प्रशासन और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद फैक्ट्री के भीतर जाकर निरीक्षण किया गया, जिसमें 109 लड़के–लड़कियां काम करते मिले। उनकी उम्र 18 साल से कम प्रतीत हो रही थी। सभी को फैक्ट्री से बाहर निकालकर बस में बैठाया गया और शहर लाया गया।

उन्हें माना में रखा गया है। लड़के-लड़कियों के परिजनों को बुलाया गया है और दस्तावेज मांगे गए हैं। दिल्ली से बचपन बचाओ संस्था के सदस्य भी जांच के लिए पहुंचे हैं।

बाल श्रम कराने पर नियोक्ता को दो साल कैद संभव

छत्तीसगढ़ में बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के तहत, 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से कोई भी काम करवाना पूर्णतः प्रतिबंधित है। 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक व्यवसायों या प्रक्रियाओं में काम करने की अनुमति नहीं है।

इनमें खनन, विस्फोटक/फायरवर्क, फैक्ट्री में हानिकारक रसायन, बीड़ी, तंबाकू, ईंट भट्ठा शामिल है। बाल श्रम एक संज्ञेय अपराध है और इसका उल्लंघन करने पर नियोक्ता को दो साल तक की कैद या ₹50,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। हालांकि सुरक्षित और गैर-खतरनाक जगहों पर काम कर सकते हैं, पर काम का समय सीमित है और शोषण या रात शिफ्ट नहीं कर सकते।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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