नक्सल असर घटते ही इंद्रावती पुल परियोजना को मिली नई रफ्तार, दोबारा टेंडर जारी

इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित अंतरराज्यीय पुल का निर्माण कार्य फिर से शुरू होने की तैयारी में है। पहले नक्सली गतिविधियों के कारण बंद पड़ा यह प्रोजेक्ट अब री-टेंडर प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है। ब्रिज कॉर्पोरेशन ने नए सिरे से करीब 28 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है। पूर्व में इसकी लागत 42 करोड़ रुपए थी, लेकिन शुरुआती निर्माण में 8 पिलर तैयार हो जाने से लागत में कमी आई है।
निर्माण कार्य पहले शुरू हो चुका था, लेकिन नक्सलियों द्वारा ठेकेदार के कर्मचारियों के अपहरण और काम बंद करने की धमकी के बाद प्रोजेक्ट रोक दिया गया था। इसके बाद लंबे समय तक कोई भी ठेकेदार इस क्षेत्र में काम करने के लिए तैयार नहीं हुआ। अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के कारण हालात बदल रहे हैं और निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
परियोजना स्थल पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है और इंद्रावती नदी के किनारे स्थायी कैंप स्थापित किए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि इस बार कड़ी सुरक्षा के बीच काम पूरा किया जाएगा।
यह पुल बीजापुर को सीधे महाराष्ट्र से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग बनेगा। पुल बनने के बाद बीजापुर से नागपुर और आगे मुंबई तक आवागमन आसान हो जाएगा। बेदरे से महाराष्ट्र के भंवरागढ़ की दूरी भी काफी कम हो जाएगी, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
अबूझमाड़ जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह परियोजना विकास के लिए अहम मानी जा रही है। पुल बनने के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी सुविधाओं की पहुंच बेहतर होगी। साथ ही सड़क, परिवहन और मोबाइल नेटवर्क के विस्तार को भी गति मिलेगी।
इंद्रावती नदी पर बनने वाला यह अब तक का सबसे लंबा पुल होगा। इससे पहले क्षेत्र में अन्य छोटे पुलों का निर्माण हो चुका है, लेकिन 930 मीटर लंबाई वाला यह प्रोजेक्ट क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।









