नेता विपक्ष को बोलने नहीं दिया गया, इसलिए किया वॉकआउट: खरगे का सरकार पर आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा से विपक्ष के वॉकआउट को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने दोनों सदनों में नेता विपक्ष की आवाज दबाने का फैसला कर लिया है और जानबूझकर उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है।

खरगे ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेताओं को लगातार बोलने से रोका जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन स्वतंत्रता सेनानियों और देश के महान नेताओं ने आजादी के लिए संघर्ष किया, उनके खिलाफ सदन में अपमानजनक बातें कही जाती हैं, लेकिन सरकार इस पर चुप रहती है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को माइक देकर मनमानी बयानबाजी करने दी जाती है, जबकि विपक्ष की बात सुनने से इनकार किया जाता है। इसी कारण सभी विपक्षी दलों ने मिलकर वॉकआउट का निर्णय लिया।

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अमेरिका के दबाव में काम कर रहे हैं और ट्रेड डील के जरिए किसानों के हितों से समझौता किया गया है। उन्होंने कहा कि जो अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप कहते हैं, वही प्रधानमंत्री करते नजर आते हैं।

खरगे के अनुसार, विपक्ष लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, युवाओं के रोजगार और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना चाहता था। उन्होंने कहा कि यदि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने दिया जाता, तो विपक्ष प्रधानमंत्री के भाषण को शांतिपूर्वक सुनता।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष की ओर से कोई हंगामा नहीं किया गया था, बल्कि बार-बार अनुरोध के बावजूद राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं मिला। इससे विपक्ष को मजबूर होकर सदन से बाहर जाना पड़ा।

कांग्रेस ने इसे संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया है। पार्टी का कहना है कि नेता विपक्ष करोड़ों नागरिकों की आवाज होते हैं और उन्हें बोलने से रोकना लोकतंत्र का अपमान है।

विपक्षी दलों ने सरकार से संसद की कार्यवाही को निष्पक्ष और सम्मानजनक बनाने की मांग की है, ताकि सभी पक्ष अपनी बात खुलकर रख सकें।