लोकसभा ने दो संसदीय समितियों का कार्यकाल बढ़ाया, समीक्षा के बाद लिया फैसला

लोकसभा में गुरुवार को दो संसदीय समितियों का कार्यकाल बढ़ाया गया है. ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ और ‘जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक’ 2025 का अध्ययन करने वाली संसदीय समितियों के कार्यकाल बढ़ा दिए. गुरुवार को इसकी जानकारी सामने आई है.

बताया जा रहा है कि उच्च शिक्षा के लिए एकल नियामक बनाने का प्रस्ताव करने वाले विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक की गहन समीक्षा के लिए गठित संयुक्त समिति गठित की गई थी. इसकी अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सदस्य डी पुरंदेश्वरी ने सदन में प्रस्ताव रखा कि समिति का कार्यकाल इस वर्ष मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक बढ़ाया जाए. जिसके बाद गुरुवार को इस पर बैठक हुई और बाद में लोकसभा ने दो संसदीय समितियों का कार्यकाल बढ़ा दिया गया.

13 मार्च तक बढ़ाने का प्रस्ताव सदन में रखा

वहीं, जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2025 के अध्ययन के लिए गठित प्रवर समिति की सदस्य और भाजपा सांसद मालविका देवी ने समिति का कार्यकाल इस वर्ष 13 मार्च तक बढ़ाने का प्रस्ताव सदन में रखा. सदन ने ध्वनिमत से दोनों प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक संसद के गत शीतकालीन सत्र में पेश किया गया था. इसकी गहन समीक्षा के लिए गत मंगलवार को 31 सदस्यीय संयुक्त समिति के गठन की अधिसूचना जारी की गई. यह न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाने के साथ ही सतत आर्थिक विकास और बेहतर व्यावसायिक सुगमता को बढ़ावा देगा।

42 कानूनों के 288 प्रावधानों को गैर-आपराधिक बनाना

मानसून सत्र में जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2025 लोकसभा में पेश किया गया था. इसे सदन ने अध्ययन के लिए प्रवर समिति को भेज दिया. इसका उद्देश्य 42 कानूनों के 288 प्रावधानों को गैर-आपराधिक बनाना है ताकि व्यापार सुगमता (EoDB) को बढ़ावा दिया जा सके और नियामकीय बोझ कम किया जा सके. जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025 भारत की नियामक सुधार यात्रा में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर है.

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