छत्तीसगढ़ में बढ़ रहा मानसिक तनाव: एक साल में 23 हजार लोगों ने मांगी मदद, 1229 ने जताए आत्महत्या के विचार

छत्तीसगढ़ में मानसिक तनाव, अवसाद और अकेलेपन के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। केंद्र सरकार की मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन टेली-मानस (14416) के आंकड़ों के अनुसार, बीते एक वर्ष में प्रदेश से 23,329 लोगों ने मानसिक सहायता के लिए कॉल किया। इनमें 1,229 लोगों ने आत्महत्या के विचार आने की बात बताई, जो कुल कॉल करने वालों का 5.27 प्रतिशत है।
आंकड़ों के मुताबिक, हर दिन औसतन 64 लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर हेल्पलाइन से संपर्क कर रहे हैं। सबसे अधिक 78.42 प्रतिशत कॉल 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं और कामकाजी लोगों की रहीं, जो करियर, रोजगार, पारिवारिक दबाव और व्यक्तिगत तनाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों ने भी हेल्पलाइन का सहारा लिया।
हेल्पलाइन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, अब लोग मानसिक समस्याओं को छिपाने के बजाय समय रहते सहायता लेने के लिए आगे आ रहे हैं। एक मामले में आर्थिक तंगी और अकेलेपन से परेशान युवक ने आत्महत्या से पहले हेल्पलाइन पर कॉल किया, जिसके बाद काउंसलिंग और तत्काल चिकित्सा सहायता से उसकी जान बचाई गई। वहीं, एक किशोर की काउंसलिंग के बाद उसके व्यवहार और पारिवारिक संबंधों में भी सुधार देखने को मिला।
राज्य में वर्ष 2025-26 के दौरान 19.37 लाख लोगों की मानसिक स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें 2.32 लाख लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित पाए गए। विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर उदासी, अवसाद, सामाजिक दबाव, अत्यधिक स्क्रीन टाइम, अनियमित दिनचर्या, अकेलापन और बढ़ता तनाव मानसिक समस्याओं के प्रमुख कारण बन रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या की स्थिति में टेली-मानस हेल्पलाइन का उपयोग करने की अपील की है, जहां 24 घंटे विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध है।











