औरंगाबाद में कुदरत का करिश्मा या अटूट बंधन? 90 साल के जुड़वा भाइयों ने एक साथ ली अंतिम विदाई 

औरंगाबाद: सांसारिक मोह माया के चक्कर में कमजोर पड़ रहे रिश्तों के बीच एक ऐसी आत्मीय घटना सामने आई है जिसने समाज को रिश्तों की गहराईयों और अपनेपन के प्रति सोचनें के लिए मजबुर कर दिया. यह वाक्या कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र के चिल्हकी गांव निवासी नब्बे वर्ष के जुड़वा बुजुर्ग सुखलाल प्रजापति और मथुरा प्रजापति के साथ घटित हुई.

जुड़वा भाइयों ने एक साथ दुनियां में कदम रखा और एक ही साथ दुनियां को अलविदा कह दिया. वर्तमान समय में रिश्तों में इतनी आत्मीयता विरले ही देखने को मिलती है. परिजनों ने बताया कि सुखलाल प्रजापति लंबे समय से बीमार रहने के कारण बिस्तर पर पड़े रहते थे.

वहीं मथुरा प्रजापति उम्र के थपेड़ो को सहते हुए चल-फिर रहे थे. शुक्रवार की दोपहर लंबे समय से बीमार चल रहे सुखलाल प्रजापति का देहांत हो गया.परिजन उनके अंतिम संस्कार की तैयारी में लग गए. इधर, भाई की मौत की खबर मथुरा प्रजापति के लिए असहनीय साबित हुई.

वे भाई के वियोग को सहन नहीं कर पाएं और घटना के आधे घंटे के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया. परिजनों ने सामाजिक और धार्मिक प्रक्रिया के उपरांत एक ही चिता पर दोनों भाइयों को मुखाग्नि दी. भाइयों के बीच आत्मीयता की यह कहानी जिसने भी सुनी रिश्तो की बेरंग दुनिया में क्षण भर के लिए सोचने को मजबूर हो गया.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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