Muharram 2026: कल मनाया जाएगा मुहर्रम, जानिए क्यों निकाला जाता है ताजिया

मुहर्रम इस्लाम के चार पवित्र महीनों में से एक है. विश्वभर के मुसलमानों के लिए इस माह का विशेष महत्व है. इस्लामिक हिजरी कैलेंडर के अनुसार, मुहर्रम का पाक माह इस्लाम धर्म का पहला महीना होता है. यानी इसी माह से इस्लामिक नववर्ष की शुरुआत होती है. हालांकि, इस्लाम में मुहर्रम के पहले 10 दिन को गम और मातम के माने जाते हैं, क्योंकि ये वही समय होता है, जिसमें इराक के कर्बला में जंग लड़ी गई थी और जिसमें पैगंबर मोहम्मद के नाती इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ शहादत दी थी.
इस दौरान दुनिया भर के मुसलमान इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मजलिस, मातम, सबील और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं. इस महीने का सबसे महत्वपूर्ण दिन आशूरा को माना जाता है. आशूरा मुहर्रम की 10वीं तारीख को मनाया जाता है. चांद दिखने में एक दिन की वजह से सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में आशूरा आज मनाया जा रहा हैं. वहीं भारत में 26 जून, शुक्रवार यानी कल ये मनाया जाएगा. इस दौरान ताजिया भी निकाला जाएगा. आइए जानते हैं कि ये क्यों निकाला जाता है?
ताजिया क्या होता है?
मुहर्रम के दौरान सबसे प्रमुख प्रतीक ताजिया होता है. ताजिये एक धार्मिक ढांचा भर नहीं है, बल्कि ये इस्लामिक इतिहास और परंपरा की एक लंबी कहानी कहता है. भारत के कई शहरों में मुहर्रम के दौरान ताजिये निकाले जाते हैं. लाखों लोग इन जुलूसों में शामिल होते हैं. ताजिये को इमाम हुसैन के कर्बला स्थित मकबरे का प्रतीकात्मक मॉडल माना जाता है. इसे कागज, बांस, लकड़ी, धातु और अन्य सजावटी चीजों से बनाया जाता है.
इसको खास तौर पर मुहर्रम के लिए तैयार किया जाता है. आमतौर पर ताजिये को मुसलमान मुहर्रम की पहली तारीख से पहले या इसके शुरू के दिनों में घरों, इमामबाड़ों और अजाखानों में लाते हैं. इसके बाद दसवीं मुहर्रम यानी आशूरा के दिन इसको दफनाया जाता है या तय जगह तक ले जाया जाता है.
मुहर्रम में ताजिया क्यों निकाला जाता है?
मुहर्रम के दौरान जो भी परंपराएं निभाई जाती हैं, उनमें से कई ताजिये के आसपास केंद्रित रहती हैं. इन पंरपराओं में मजलिस, मातम, नौहा, जुलूस, आलम और सबील शामिल है. ताजिया आने के बाद अजाखानों और इमामबाड़ों में शोक सभाओं का आयोजन किया जाता है. इस दौरान लोग या हुसैन की सदाएं लगाते हैं और कर्बला की घटनाएं याद करते हैं. महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्थानों पर शोक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है.











