पीएचडी कराने का झांसा देकर छात्रा से दुष्कर्म का आरोप, रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के गेस्ट टीचर पर FIR

मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय अपने अलग-अलग मामलों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहा है. एक बार फिर विश्वविद्यालय में अध्ययनरत एक छात्रा ने विश्वविद्यालय के एक अतिथि शिक्षक पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है. पीड़िता की शिकायत के आधार पर विजयनगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. वहीं मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी अतिथि शिक्षक की सेवाएं समाप्त कर दी हैं. फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश में जुटी हुई है

एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा के अनुसार, सिवनी निवासी युवती की पहचान वर्ष 2022 में विश्वविद्यालय के एक अतिथि शिक्षक, जो चित्रकूट निवासी बताए जा रहे हैं, से हुई थी. आरोप है कि शिक्षक ने छात्रा को पीएचडी कराने और शैक्षणिक सहायता का भरोसा दिलाकर अपने विश्वास में लिया. इसी दौरान दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और आरोपी ने शादी का वादा भी किया.

पीड़िता का आरोप है कि आरोपी शिक्षक ने उसे दीनदयाल चौक स्थित एक होटल में बुलाया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया. इसके बाद वह लगातार शादी का झांसा देकर उसका दैहिक शोषण करता रहा.

छात्रा ने शिकायत में यह भी कहा है कि जब उसने आरोपी पर शादी करने का दबाव बनाया तो वह टालमटोल करने लगा. विरोध करने पर आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी और किसी को घटना की जानकारी न देने के लिए दबाव बनाया.

काफी समय तक मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलने के बाद छात्रा ने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की. शिकायत मिलने के बाद विजयनगर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है. इधर, मामला उजागर होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी कार्रवाई करते हुए आरोपी अतिथि शिक्षक की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं. प्रशासन का कहना है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया में पूरा सहयोग किया जाएगा.

पहले भी मैनेजमेंट पर लगे आरोप

गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब विश्वविद्यालय प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगे हों. इससे पहले एक महिला अधिकारी द्वारा कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा पर अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया था.

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जिला कलेक्टर को निर्देश दिए थे कि फॉरेंसिक और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से यह जांच कराई जाए कि कथित घटना के दिन विश्वविद्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे चालू थे या नहीं.

अदालत ने यह भी जानकारी मांगी थी कि कैमरे और डीवीआर कब स्थापित किए गए, कितने समय तक कार्यरत रहे और घटना के समय उनके बंद होने का कारण क्या था. न्यायालय ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव से हलफनामा प्रस्तुत कर यह स्पष्ट करने को भी कहा था कि घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज तत्काल सुरक्षित क्यों नहीं किए गए और कैमरों में आई तकनीकी खामी को समय रहते दूर क्यों नहीं किया गया.

मामले की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति, जिसमें तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शामिल थे, ने कुलगुरु और शिकायतकर्ता महिला अधिकारी के बयान दर्ज किए थे. जांच पूरी होने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट को सौंप दी थी. हालांकि, इस रिपोर्ट पर अब तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है.

वहीं, अतिथि शिक्षक के मामले में एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है. आरोपी फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है. पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. मामले की विवेचना जारी है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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