प्रकाश झा की वेब सीरीज ‘संकल्प’ में राजनीति और रणनीति का खेल, नाना पाटेकर बने मॉडर्न चाणक्य

फिल्मकार Prakash Jha की नई वेब सीरीज ‘संकल्प’ राजनीतिक ड्रामा और रणनीति के अनोखे मिश्रण के साथ सामने आई है। इस सीरीज में सत्ता, शिक्षा और प्रशासन के बीच चल रहे जटिल खेल को दिखाने की कोशिश की गई है। कहानी का केंद्र एक ऐसे किरदार के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसे आधुनिक दौर का चाणक्य कहा जा सकता है।
सीरीज में मुख्य भूमिका Nana Patekar ने निभाई है, जो कन्हैयालाल उर्फ माट्साहब के किरदार में नजर आते हैं। कहानी के अनुसार कन्हैयालाल मगध क्षेत्र में एक गुरुकुल चलाते हैं और देश की राजनीति, शिक्षा और प्रशासन को अपने तरीके से दिशा देने का संकल्प रखते हैं। उनके गुरुकुल से पढ़े छात्र देश के अलग-अलग हिस्सों में महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचते हैं और उनके प्रति वफादार रहते हैं।
कहानी की शुरुआत करीब 30 साल पहले से होती है, जब कन्हैयालाल, वकार मपिल्लाह और प्रशांत सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति से जुड़े होते हैं। छात्रसंघ चुनाव के दौरान वर्चस्व की लड़ाई में कन्हैयालाल को उनके साथियों द्वारा टीम से बाहर कर दिया जाता है और उसे पटना लौटना पड़ता है। यही घटना उसके जीवन का टर्निंग पॉइंट बनती है।
पटना लौटने के बाद कन्हैयालाल गुरुकुल की स्थापना करते हैं और गांवों के प्रतिभाशाली बच्चों को चुनकर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं। धीरे-धीरे उनके छात्र देश के विभिन्न विभागों में उच्च पदों तक पहुंच जाते हैं। हालांकि इस बीच उनके गुरुकुल पर बाल अधिकार उल्लंघन और तस्करी जैसे आरोप भी लगते हैं।
सीरीज में प्रशांत सिंह का किरदार Sanjay Kapoor ने निभाया है, जो बाद में मुख्यमंत्री बन जाते हैं। वहीं वकार मपिल्लाह की भूमिका Neeraj Kabi ने निभाई है। दूसरी ओर माट्साहब के सहयोगियों में आईपीएस आदित्य वर्मा की भूमिका Mohammed Zeeshan Ayyub निभाते हैं, जो अलग-अलग रणनीतियों के जरिए सत्ता के समीकरण बदलने की कोशिश करते हैं।
सीरीज के दस एपिसोड में सत्ता संघर्ष, चुनावी रणनीतियां, फंडिंग, फेक करंसी, ब्लैक मनी और मुफ्त योजनाओं जैसे कई मुद्दों को दिखाया गया है, जो समकालीन राजनीति की झलक पेश करते हैं। कहानी में कई ऐसे मोड़ आते हैं जहां राजनीति और व्यक्तिगत बदले की भावना एक साथ आगे बढ़ती दिखाई देती है।
‘संकल्प’ के पहले सीजन के अंत में कहानी एक बड़े मोड़ पर रुकती है और संकेत मिलता है कि आगे आने वाले भाग में कन्हैयालाल का असली खेल सामने आएगा। अंतिम दृश्य में माट्साहब नए संकल्प की बात करते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कहानी का अगला अध्याय और भी बड़े घटनाक्रमों के साथ सामने आ सकता है।
अभिनय के स्तर पर नाना पाटेकर ने अपने किरदार में प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। उनके साथ अन्य कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं को मजबूती से निभाया है, जिससे यह सीरीज राजनीतिक ड्रामा पसंद करने वाले दर्शकों के लिए खास बन जाती है।











