गुरुग्राम डबल डेथ केस में नया मोड़: पिता बोले- जांच पूरी होने से पहले बेटे को हत्यारा बताना गलत

गुरुग्राम में महिला सहकर्मी की मौत और उसके बाद रेलवे ट्रैक पर एआई इंजीनियर श्रेष्ठ मलिक का शव मिलने के मामले में नया मोड़ आ गया है। मृतक के पिता दीपक मलिक ने जांच पूरी होने से पहले उनके बेटे को हत्यारा बताए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि बिना सभी तथ्यों की जांच किए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।
पिता ने कहा कि उनका बेटा शांत स्वभाव का था और कभी ऐसा व्यवहार नहीं किया जिससे लगे कि वह किसी की हत्या कर सकता है। उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष और सभी पहलुओं से जांच करने की मांग की है। उनका कहना है कि घटना वाली रात वास्तव में क्या हुआ, इसका खुलासा डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगा।
दीपक मलिक ने यह भी दावा किया कि घटना के बाद जब वे गुरुग्राम पहुंचे तो उन्हें कंपनी परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। साथ ही बेटे के सहकर्मियों से भी मिलने की अनुमति नहीं मिली। उनका मानना है कि सहकर्मियों से बातचीत होने पर जांच में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती थीं।
उन्होंने श्रेष्ठ और महिला सहकर्मी के बीच प्रेम संबंध या लिव-इन रिलेशनशिप की चर्चाओं को भी खारिज किया। पिता का कहना है कि जिस युवती की मौत हुई, उसने घटना से दो दिन पहले अपना कमरा खाली कर दिया था। ऐसे में वह सीधे श्रेष्ठ के कमरे में क्यों पहुंची, यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय है।
परिवार का कहना है कि उन्हें अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रति नहीं मिली है और पुलिस द्वारा जब्त किए गए मोबाइल, लैपटॉप व अन्य सामान की जानकारी भी साझा नहीं की गई है। उनका आग्रह है कि जांच किसी एक थ्योरी तक सीमित न रखी जाए और यदि जरूरत हो तो अन्य संभावित पहलुओं की भी पड़ताल की जाए।
श्रेष्ठ मलिक ने एनआईटी रायपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और पिछले वर्ष गुरुग्राम स्थित एक निजी कंपनी में एआई इंजीनियर के रूप में नौकरी शुरू की थी। पुलिस फिलहाल शुरुआती जांच के आधार पर महिला की हत्या के बाद आत्महत्या की आशंका जता रही है, जबकि परिवार इस निष्कर्ष से सहमत नहीं है और जांच पूरी होने तक किसी भी तरह का अंतिम फैसला न देने की मांग कर रहा है।











