CGPSC पेपर लीक मामले में पूर्व सचिव को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा-2021 के बहुचर्चित पेपर लीक और भर्ती घोटाले में जेल में बंद आयोग के पूर्व सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करना ऐसा अपराध है, जो लाखों युवाओं के भविष्य और व्यवस्था पर गहरा असर डालता है। अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह का कृत्य समाज के विश्वास को तोड़ता है और इसे अत्यंत गंभीर अपराध माना जाना चाहिए।
CBI जांच में मिले अहम साक्ष्य
मामले की जांच कर रही CBI के अनुसार, जीवन किशोर ध्रुव वर्ष 2020 से 2022 के दौरान CGPSC के सचिव पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले अपने बेटे सुमित ध्रुव तक पहुंचाए। जांच एजेंसी ने भिलाई स्थित उनके आवास पर छापेमारी के दौरान मुख्य परीक्षा से जुड़े दस्तावेज, उत्तर-पुस्तिकाएं और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए। जांच में यह भी सामने आया कि जब्त दस्तावेजों में दर्ज अधिकांश प्रश्न मुख्य परीक्षा में पूछे गए थे। आरोप है कि इन्हीं प्रश्नपत्रों के आधार पर उनके बेटे का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ।
बचाव पक्ष की दलीलें खारिज, जांच जारी
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी ने अपने बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी पहले ही आयोग को दे दी थी और वे गोपनीय कार्यों से स्वयं को अलग कर चुके थे। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि उनका नाम प्रारंभिक एफआईआर में नहीं था और वे लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं। वहीं CBI ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी संवैधानिक जिम्मेदारी वाले पद पर रहते हुए परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने में विफल रहे और उनके खिलाफ पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी। मामले की जांच और अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।











