petrol diesel price hike- तेल कंपनियां को हो रहा कितना नुकसान , यहाँ जानिए
ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से परिवहन लागत बढ़ेगी, खाद्य पदार्थ महंगे होंगे और घरेलू बजट पर असर पड़ेगा, जिससे अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

petrol diesel price hike/दिल्ली। सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गई 3 रुपए प्रति लीटर की मामूली बढ़ोतरी, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान के मुकाबले कुछ भी नहीं है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
petrol diesel price hike/अधिकारी ने कहा कि यह मामूली बढ़ोतरी सरकार की उस व्यापक रणनीति को दर्शाती है, जिसके तहत उपभोक्ताओं को वैश्विक तेल संकट का पूरा असर झेलने से बचाया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 26 रुपए और डीजल पर करीब 82 रुपए का अंडर-रिकवरी नुकसान हो रहा है। ऐसे में अधिकारियों का कहना है कि 3 रुपए की बढ़ोतरी, सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल पर पड़ रहे वित्तीय बोझ का केवल एक छोटा हिस्सा ही कवर कर पाएगी।
शीर्ष सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बड़ा इजाफा रोकने के लिए सरकारी तेल विपणन कंपनियां और केंद्र सरकार मिलकर रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपए का नुकसान उठा रही हैं।
सूत्रों ने बताया कि सरकार का संदेश साफ है कि वह भारतीय उपभोक्ताओं पर वैश्विक कच्चे तेल की महंगाई का पूरा बोझ नहीं डालना चाहती।petrol diesel price hike
अधिकारियों ने यह भी कहा कि ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से परिवहन लागत बढ़ेगी, खाद्य पदार्थ महंगे होंगे और घरेलू बजट पर असर पड़ेगा, जिससे अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र को भी वैश्विक कीमतों के झटकों से बचाने की कोशिश कर रही है। सूत्रों ने बताया कि किसानों को राहत देने के लिए सरकार पहले से ही लगभग 2.25 लाख करोड़ रुपए की उर्वरक सब्सिडी का बोझ उठा रही है।
अधिकारियों ने कहा कि सरकार की मौजूदा नीति अचानक कीमतें बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे ईंधन खपत कम करने और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ईंधन की खपत कम करने और आयात पर निर्भरता घटाने पर जोर दे रहे हैं।
चिंता की एक बड़ी वजह भारत का बढ़ता आयात बिल भी है। सरकारी सूत्रों ने इसे तेल और सोने के आयात से होने वाला ‘दोहरा बड़ा दबाव’ बताया। भारत का सालाना कच्चे तेल का आयात बिल करीब 12 से 15 लाख करोड़ रुपए है और कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से देश के आयात बिल में लगभग 13 से 14 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है।
अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा तेल संकट की मुख्य वजह अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर है, जहां से सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा निर्यात गुजरते हैं।petrol diesel price hike
एक सूत्र ने कहा, “इन भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर भारत का कोई नियंत्रण नहीं है,” और सरकार जानबूझकर पूरा बाहरी दबाव सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डालना चाहती।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि 2012-13 के संकट काल की तुलना में भारत की आर्थिक स्थिति अब काफी मजबूत है। चालू खाता घाटा जीडीपी के 1.5 प्रतिशत से नीचे है, जबकि पहले यह लगभग 5 प्रतिशत तक पहुंच गया था। साथ ही वैश्विक अस्थिरता के बावजूद महंगाई भी फिलहाल नियंत्रण में बनी हुई है।
इंडियन ऑयल के अधिकारियों ने बताया कि ईंधन की किसी भी तरह की कमी से बचने के लिए कंपनी की रिफाइनरियां फिलहाल पूरी क्षमता के साथ चौबीसों घंटे काम कर रही हैं।
एक अधिकारी ने कहा कि देश के पास 60 दिनों की जरूरत के बराबर कच्चे तेल का भंडार मौजूद है, जो रिफाइनरियों की आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त है। इसलिए फिलहाल ईंधन उत्पादन को लेकर किसी तरह की समस्या नहीं है।petrol diesel price hike











