सारंगढ़ में चूना पत्थर खदान का विरोध:5 गांव के 2 हजार ग्रामीण प्रभावित, कहा- अपनी जमीन नहीं देंगे; विरोध के बाद सुनवाई स्थगित

छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के ग्राम कपिस्दा (ब) में चूना पत्थर खदान का ग्रामीणों ने विरोध किया है। दरअसल 5 गांव के करीब 2 हजार ग्रामीण इस खदान से प्रभावित होंगे। इसलिए वे 16 नवंबर की सुबह से धरने पर बैठे रहे। रात भर बच्चे महिलाएं सभी धरने पर बैठे रहे। जिसके बाद सुबह एसडीएम के आश्वासन के बाद धरना खत्म किया।

जानकारी के मुताबिक, ग्रीन सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी खदान खोलने जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि खदान के लिए उनके खेतों और अन्य जमीन-खेत को अधिग्रहण किया जाएगा। जिनसे उनके जीवन यापन करने के लिए जो सहारा है वह कंपनी को जाएगा। जिसका विरोध किया जा रहा है।

ग्रामीणों के धरने के बाद जनसुनवाई स्थगित

खदान के लिए 17 नवंबर को जनसुनवाई होना था। जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया। मौके पर पुलिस बल की भी तैनाती रही। भारी विरोध के बाद एसडीएम ने लिखित में सुनवाई स्थगित होने की जानकारी दी, जिसके बाद ग्रामीण धरने से हट गए।

धौराभांठा, सरसरा, जोगनीपाली, कपीसदा ब, लालाधुरवा गांव की महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ और बुजुर्ग भी धरना प्रदर्शन में शामिल थे। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) वर्षा बंसल ने ग्रामीणों को जनसुनवाई निरस्त होने की लिखित जानकारी दी

500 एकड़ जमीन में खुदेगा खदान

यह जनसुनवाई ग्रीन सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा आयोजित की जा रही थी। कंपनी कपिस्दा सहित आसपास के पांच गांवों से लगभग 500 एकड़ भूमि में चूना पत्थर खदान खोलना चाहती है। इसके लिए 17 नवंबर को जनसुनवाई का आयोजन था, जो विरोध के बाद स्थगित हो गया।

चूना पत्थर खदान खुलने का विरोध

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि वे किसी भी कीमत पर अपने गांव में चूना पत्थर खदान नहीं खुलने देंगे। उन्होंने सीधे जिला प्रशासन को चेतावनी दी थी। सारंगढ़ की विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े भी ग्रामीणों के समर्थन में धरना स्थल पर पहुंची थी।

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