प्यून को हर-महीने मिल रहा था 4.5 लाख भत्ता:बिलासपुर में 6 महीने में 30 लाख ट्रांसफर;कांग्रेस ने DEO-जूनियर ऑडिटर की CS से शिकायत की

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जिला शिक्षा विभाग में बड़े वित्तीय घोटाले का आरोप लगा है। युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अंकित गौरहा का कहना है कि बीईओ कोटा कार्यालय में पदस्थ रहे प्यून को हर महीने 4 लाख से 4.50 लाख रुपए का भत्ता भुगतान किया गया है। इस तरह करीब 30 लाख रुपए अकाउंट में डाले गए हैं।

प्रदेश महासचिव अंकित गौरहा ने प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) विजय टांडे और स्थापना शाखा के जूनियर ऑडिटर सुनील यादव पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की शिकायत प्रमुख सचिव की है और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, विजय टांडे ने आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि शिकायत की जांच संयुक्त संचालक शिक्षा की ओर से कराई जा रही है, इसलिए अब इस मामले में कुछ कहना उचित नहीं होगा। इतना तय है कि जांच के बाद सत्य उजागर हो जाएगा।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

जानकारी के मुताबिक देवेंद्र कुमार पालके कोटा बीईओ कार्यालय में प्यून के पद पर पदस्थ रहे। आरोप है कि प्यून को हर महीने 4 लाख से 4.50 लाख रुपए तक भत्ता दिया गया, जो सामान्य वेतन ढांचे से कई गुना अधिक है।

वर्दी धुलाई भत्ता और अन्य भत्ते के नाम करीब 30 लाख रुपए देवेंद्र कुमार पालके के खाते में ट्रांसफर किए हैं।

सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच भुगतान

अंकित गौरहा ने आरोप लगाया कि कोटा विकासखंड में पदस्थ रहते समय विजय टांडे ने सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच कर्मचारी देवेंद्र कुमार पालके को कर्मचारी कोड के जरिए 30 लाख रुपए जारी किए।

DDO रहते पूरी प्रक्रिया पर नियंत्रण

शिकायत में बताया गया है कि उस समय विजय टांडे विकासखंड शिक्षा अधिकारी कोटा के साथ आहरण-संवितरण अधिकारी (डीडीओ) भी थे। ऐसे में पूरा भुगतान उनकी जानकारी और अनुमति से ही संभव हुआ। बिना मिलीभगत इतनी बड़ी राशि का लेन-देन संभव नहीं होने का आरोप लगाया गया है।

खातों की जांच की मांग

अंकित गौरहा ने देवेंद्र कुमार पालके और अधिकारियों के बीच बैंक लेन-देन की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे वास्तविक आर्थिक लाभ और पूरे कथित षड्यंत्र का खुलासा हो सकेगा।

पहले भी उठा मामला, कार्रवाई अधूरी

यह मामला पहले कलेक्टर की समय-सीमा बैठकों में भी उठ चुका है। कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे। कोटा थाने में केस दर्ज हुआ, लेकिन इसके बाद भी विजय टांडे पर ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप है।

कारनामा छिपाने के लिए अधीनस्थ निलंबित

अंकित गौरहा ने आरोप लगाया कि अनियमितताओं को छिपाने के लिए संबंधित क्लर्क और प्यून को निलंबित कर दिया गया, जबकि वास्तविक जिम्मेदारी उच्च अधिकारियों की थी। शिकायत में जिला शिक्षा कार्यालय के कुछ अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता का भी जिक्र है।

शिकायत में कहा गया है कि मासिक व्यय पत्रक और बजट दस्तावेजों में हेरफेर कर गबन की राशि छिपाई गई। हस्ताक्षरयुक्त हार्ड कॉपी जमा होने के बावजूद वास्तविक वित्तीय स्थिति अलग रखी गई।

पुराने मामलों में कार्रवाई नहीं, पदोन्नति मिली

गौरहा ने बताया कि यह पहला मामला नहीं है। पहले सहायक ग्रेड-2 राजेश कुमार प्रताप के प्रकरण में कार्रवाई हुई, लेकिन उसी मामले में विजय टांडे पर कोई कदम नहीं उठाया गया।

दिवंगत शिक्षक पुष्कर भारद्वाज की पत्नी नीलम भारद्वाज ने रिश्वत मांगने की शिकायत शपथ-पत्र के साथ दी थी, जो जांच में सही पाई गई। संबंधित क्लर्क निलंबित हुआ, लेकिन विजय टांडे के खिलाफ जांच की अनुशंसा के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में उन्हें प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बना दिया गया।

जांच प्रभावित होने की आशंका, निलंबन की मांग

शिकायत में कहा गया है कि प्रभारी डीईओ के खिलाफ पहले से कई मामलों की जांच चल रही है। ऐसे में पद पर बने रहने से जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए उन्हें तत्काल निलंबित कर स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। सुनील यादव के खिलाफ भी सबूत सौंपे गए हैं।

संयुक्त संचालक शिक्षा ने चुप्पी साधी

प्रभारी डीईओ विजय टांडे पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच संयुक्त संचालक शिक्षा आरपी आदित्य कर रहे हैं। इस मामले में उनसे कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्हें एसएमएस भेजकर यह पूछा गया कि जांच कमेटी में कौन-कौन शामिल हैं और रिपोर्ट कब तक दी जाएगी।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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