रायबरेली का ‘जलियांवाला बाग’: 105 वर्ष पहले आज हुआ था मुंशीगंज गोलीकांड…

रायबरेली: 105 वर्ष पहले 7 जनवरी 1921 रायबरेली के इतिहास में अमिट छाप बनाए हुए है, क्योंकि 7 जनवरी को रायबरेली में किसानों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई गईं। यह घटना मुंशीगंज गोलीकाण्ड के नाम से चर्चित है.
इसी दौरान अफवाह फैली कि अंग्रेजो ने लखनऊ जेल में अमोल शर्मा और बाबा जानकीदास की हत्या कर दी गई। अपने नेताओं की हत्या की बात सुनकर किसान आक्रोशित हो उठे और 7 जनवरी 1921 कि रायबरेली में सई नदी के किनारे किसानों का विशाल जनसमूह जुटने लगा. अंग्रेजों ने भी दमनकारी नीति अपनाते हुए पुलिस बलों की कई टुकड़ियां तैनात कर दी.
कुछ दिनों पहले ही कुछ किसान नेताओं ने तार के माध्यम से रायबरेली में बिगड़ते हालातों के बारे में जवाहर लाल नेहरु को जानकारी दे दी थी. इस भारी विरोध के नेहरू भी रायबरेली पहुंच गए। नेहरू नदी के पुल तक पहुंचे लेकिन फिर उन्हें कलेक्ट्रेट में नजरबंद कर दिया गया। बताते हैं कि अंग्रेजों ने इस गोलीकांड के लिए पहले ही योजना बना ली थी. प्रशासन का आदेश मिलते ही पुलिसवालों ने हजारों निहत्थे किसानों पर गोलियां बरसा दीं.
रायबरेली के मुंशीगंज इलाके में सई नदी के किनारे विरोध जता रहे किसानों की लाशें बिछ गईं। नदी पर बने पुल और नीचे किनारों पर हजारों लोग बदहवास हालत में पड़े रहे. इनमें कई मर चुके थे तो कई घायल थे. कहा जाता कि 7 जनवरी को मुंशीगंज में हुए इस गोलीकांड के कारण नदी का पानी लाल हो गया था.
इस कांड में मृतकों की संख्या की आधिकारिक जानकारी कभी नहीं हो पाई. हालांकि, मृतकों की संख्या सैंकड़ों में बताई गई थी. आज भी रायबरेली में इन किसानों के नाम पर शहीद स्मारक बना हुआ है. मुंशीगंज का यह गोलीकांड गुलाम भारत में साल 1919 में हुए जलियांवाला बाग के बाद दूसरा सबसे बड़ा हत्याकांड था.











