नक्सल प्रभावित इलाकों में गूंजेगा तिरंगा, 14 अगस्त को कर्रेगुट्टा में होगा समापन: शहीद स्थलों से जुटाई जाएगी मिट्टी, महिला बाइकर्स भी लेंगी हिस्सा

बस्तर के उन इलाकों में अब तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी, जिन्हें कभी नक्सल गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता था। तीन दिवसीय बस्तर तिरंगा यात्रा की शुरुआत 12 अगस्त को नारायणपुर से होगी। यात्रा दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के अंदरूनी इलाकों से होकर गुजरेगी। इस दौरान बड़ी संख्या में बाइकर्स और महिला बाइकर्स तिरंगा लेकर शामिल होंगी।

यात्रा का नेतृत्व डिप्टी सीएम विजय शर्मा बाइक चलाकर करेंगे। यात्रा में स्थानीय युवा, स्वयंसेवी संगठन, महिला समूह, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, स्काउट-गाइड और जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यात्रा बुरकापाल, मिनपा-ताड़मेटला, जगरगुंडा, सिलगेर और टेकलगुड़ेम जैसे इलाकों से होकर गुजरेगी।

इन क्षेत्रों में नक्सली हिंसा के दौरान शहीद हुए जवानों और नागरिकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। जिन स्थानों पर बड़े हमले हुए थे, वहां पौधारोपण भी किया जाएगा। ‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ अभियान के तहत शहीदों की स्मृति में पौधे लगाए जाएंगे।

शहीद स्थलों की मिट्टी सहेजने की पहल

यात्रा के दौरान उन स्थानों की मिट्टी भी एकत्र की जाएगी, जहां नक्सली हमलों में जवानों और आम लोगों ने जान गंवाई थी। संबंधित विधानसभा क्षेत्रों से भी मिट्टी जुटाई जाएगी। इसे भविष्य में शहीदों की याद में बनाए जाने वाले संग्रहालय में सुरक्षित रखने की योजना है।

यात्रा के दौरान नारायणपुर के मुंजमेटा, झारागांव, धौड़ाई और कन्हारगांव सहित अन्य स्थानों पर भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम होंगे। इन इलाकों में कभी हिंसा और भय का माहौल रहा था, लेकिन अब यहां तिरंगा लेकर पहुंचने और शांति, सुरक्षा व लोकतंत्र का संदेश देने की तैयारी है।

महिला बाइकर्स भी हाथों में तिरंगा लेकर यात्रा का हिस्सा बनेंगी। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में राष्ट्रीय एकता और शांति का संदेश पहुंचाना है।

कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर तिरंगा फहराकर होगा समापन

तीन दिन की यात्रा का समापन 14 अगस्त को कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर तिरंगा फहराने के साथ होगा। कर्रेगुट्टा का इलाका लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों के कारण संवेदनशील रहा है। हाल के समय में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद यहां की स्थिति में बदलाव आया है।

यात्रा का फोकस सिर्फ बाइक रैली तक सीमित नहीं रहेगा। शहीदों को श्रद्धांजलि देने, उनकी यादों को सहेजने, पौधारोपण करने और स्थानीय लोगों से संवाद के जरिए बस्तर में बदलते माहौल का संदेश देने की कोशिश की जाएगी। जिन रास्तों पर कभी नक्सली हिंसा का असर था, उन्हीं रास्तों पर अब तिरंगा लहराने की तैयारी है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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