टीबी का इलाज संभव है या नहीं? World TB Day पर जानें पूरी सच्चाई

टीबी की बीमारी आज भी मौजूद हैं और इसके केस हर साल आते हैं. इस बीमारी के इलाज के लिए सरकार की फ्री दवा योजनाओं और एडवांस ट्रीटमेंट देती है. लेकिन क्या ये बीमारी पूरी तरह से ठीक हो सकती है. क्यों इलाज की दवा लोग छोड़ देते हैं और इनको क्यों नहीं छोड़नी चाहिए इस बारे में एक्सपर्ट्स से जानते हैं.

दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में मेडिसिन विभाग में डॉ अजीत कुमार बताते हैं कि अगर टीबी का कोई भी मरीज 6 से 9 महीने तक नियमित रूप से दवाएं लेता है, तो टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है. कुछ मरीजों में कोर्स इससे लंबा भी चल सकता है, लेकिन जरूरी ये है कि लोग कोर्स पूरा करें. लेकिन कई मामलों में ऐसा होता नहीं है. इलाज शुरू होने के कुछ सप्ताह बाद मरीज के लक्षण और कमजोरी कम होने लगते हैं. इससे मरीज को लगता है कि वह ठीक हो गया है. वह सोचता है कि अब दवाएं खाने की जरूरत नहीं है. वह बीच में दवा छोड़ देते हैं. यहीं सबसे बड़ी गलती हो जाती है.

टीबी का इलाज बीच में क्यों नहीं छोड़ना चाहिए?

डॉ. कुमार कहते हैं कि टीबी के मरीजों को आराम मिलते ही कई मरीज दवाओं का कोर्स छोड़ देते हैं. टीबी के इलाज में यही सबसे बड़ी गलती इस बीमारी को पूरी तरह काबू करने के प्रयास को सफल नहीं होने दे रही है. जो लोग इलाज बीच में छोड़ देते हैं उनमें बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते हैं. वे फिर से एक्टिव हो जाते हैं. ऐसे में बीमारी काबू में नहीं आती है. मरीज को लगता है कि वह ठीक हो गया है, लेकिन वह संक्रमित रहता है और दूसरों को भी बीमारी फैलाता है.

डॉ कुमार कहते हैं कि लोगों को सलाह है कि टीबी के इलाज के लिए जितने महीनों का कोर्स है उसको पूरा करें और हर दिन समय पर अपनी दवाएं लें और डॉक्टर ने जो डाइट बताई है उसको भी लेते रहें. टीबी के मामले में कोई लापरवाही न करें.

किन लक्षणों में सतर्क रहें?
2 हफ्ते से ज्यादा खांसी
बलगम या खून आना
लगातार बुखार और पसीना
तेजी से वजन घटना

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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