ममता से क्यों नाराज हुए मुसलमान? इमाम और मोअज्जिनों के भत्ते पर बढ़ा असंतोष

पश्चिम बंगाल सरकार के बजट 2026 में आशा वर्कर्स, आंगनवाड़ी कर्मचारियों, सिविक वॉलंटियर्स और अन्य वर्गों के भत्ते में बढ़ोतरी की गई है, लेकिन इमामों और मोअज्जिनों के भत्ते में कोई बढ़ोतरी नहीं होने से मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ गई है। इसे लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर सवाल उठने लगे हैं।

मुस्लिम समुदाय राज्य में एक बड़ा वोट बैंक माना जाता है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी करीब 27 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर लगभग 34 प्रतिशत मानी जाती है। लंबे समय से यह वर्ग ममता बनर्जी का समर्थक रहा है, लेकिन चुनाव से पहले बढ़ती नाराजगी उनके लिए चुनौती बन सकती है।

इमाम संगठनों से जुड़े नेताओं का कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, जबकि उन्हें मिलने वाला मासिक भत्ता काफी कम है। जलपाईगुड़ी की एक मस्जिद के इमाम जहीरुल इस्लाम ने कहा कि सरकार ने लगभग सभी वर्गों के लिए राहत दी है, लेकिन इमामों और मोअज्जिनों के लिए कुछ नहीं किया गया। उनका कहना है कि तीन हजार रुपये के आसपास मिलने वाले भत्ते से गुजारा मुश्किल है।

इसी तरह, कई मोअज्जिनों ने भी भत्ता न बढ़ने पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बढ़ती कीमतों के बीच यह राशि बहुत कम है और इसमें सुधार होना चाहिए था। कुछ लोगों ने मांग की है कि मासिक भत्ता कम से कम छह से सात हजार रुपये किया जाए।

मुस्लिम समुदाय के अन्य लोगों का भी मानना है कि इमाम समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें सम्मानजनक सहायता मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि सरकार को इस वर्ग की आर्थिक स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए था।

राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि बजट में कई वर्गों को लाभ दिया गया है, लेकिन इमामों को नजरअंदाज किया गया, जिससे असंतोष बढ़ा है। उनका दावा है कि इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है।

वहीं, सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि इमाम भत्ता योजना की शुरुआत ममता बनर्जी ने ही की थी और सरकार भविष्य में इस पर विचार कर सकती है। उनके अनुसार, इस मुद्दे से चुनावी समर्थन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

फिलहाल, बजट में भत्ता न बढ़ने को लेकर मुस्लिम समुदाय में चर्चा तेज है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है।

jagjaahir desk

जगजाहिर में स्पोर्ट्स बीट पर काम कर रहे हैं। स्पोर्ट्स में क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, टेनिस, बैडमिंटन और एथलेटिक्स गेम्स के मामलों पर काफी अच्छी पकड़ रखते हैं। हमारे पास विभिन्न मुद्दों पर लिखने का 8 साल से अधिक समय का अनुभव है। पत्रकारिता के अपने इस करियर में कई बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स जिसमें साल 2015 और 2019 और 2023 वनडे वर्ल्ड कप, आईपीएल और फुटबॉल वर्ल्ड कप को कवर किया है।
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