सिस्टम देख रहा, ठग आंखों के सामने पैसा निकाल रहे:रात 8 बजे बाद इनसे निपटना बड़ी चुनौती, बैंककर्मी नहीं होने के कारण परेशानी

राजस्थान में शाम 8 बजे के बाद साइबर ठगी का पैसा होल्ड करवा पाना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। वजह है पुलिस मुख्यालय में संचालित हाइटेक ‘राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर’ (R4C) में रात के समय बैंक प्रतिनिधि का नहीं होना।

हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत होते ही पुलिस यह तो तुरंत पता लगा लेती है कि पीड़ित का पैसा कब कहां- कौनसे अकाउंट में ट्रांसफर हो रहा है।

लेकिन रात 8 बजे के बाद बैंक प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं होने के चलते पैसा होल्ड कर पाना चुनौती बना हुआ है। आखिर कैसे साइबर ठग चकमा देने में कामयाब हो रहे हैं?

साइबर ठगी रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 का सेंट्रलाइज्ड आर 4 सी सेंटर पुलिस मुख्यालय में 6 महीने पहले शुरू हुआ था।

सेंटर में पुलिस के साइबर एक्सपर्ट और बैंक के करीब 30 लोगों की ड्यूटी है करीब 8-10 नेशनल और बड़े बैंकों के प्रतिनिधि अपने बैंकिंग आवर्स में ड्यूटी देते हैं।

एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि 1930 पर ठगी की शिकायत आने के बाद उसकी जानकारी बैंक के सेंट्रल सिस्टम को भेजी जाती है।

इसके बाद बैंक रकम को फ्रीज करता है। इसके लिए 2 तरीके हैं। एक तो सिस्टम ऑटोमैटिक ही उन खातों को ट्रेस करता है रकम होल्ड कर देता है। इसे ऑटोमेटिक लियन कहते हैं।

लेकिन कई बार ऑटोमैटिक लियन नहीं लग पाता यानी ऑटोमेटिक तरीका काम नहीं करता, उस कंडीशन में पुलिस बैंक प्रतिनिधि की मदद से मैनुअली पैसा होल्ड करवाती है। इसे मैनुअल लियन कहते हैं। दिन में तो बैंकों के प्रतिनिधि उपलब्ध रहते हैं, इसलिए काम में आसानी रहती है। लेकिन रात 8 बजे से सुबह 9 बजे तक और छुट्टी के दिनों में बैंक प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं होने पर परेशानी आती है। हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें पुलिस कुछ ही रकम होल्ड करवा पाई।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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