महाराष्ट्र में 35 दिन में मिले 6,111 नए टीबी मरीज, AI ने 11,091 गांवों को बताया संवेदनशील

केंद्र सरकार के 100 दिवसीय ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के पहले 35 दिनों में महाराष्ट्र में टीबी के 6,111 नए मरीजों की पहचान की गई है। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित जोखिम मूल्यांकन के जरिए राज्य के 11,091 गांवों को टीबी संक्रमण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। यह जानकारी राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने विधानसभा में दी।

11 हजार से अधिक गांव संवेदनशील घोषित

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि एआई विश्लेषण के आधार पर कई जिलों के गांवों को उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। इनमें यवतमाल के 539 गांव, अमरावती के 504, नागपुर के 482, नासिक के 488 और रायगढ़ के 488 गांव शामिल हैं। इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी और जांच अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि संक्रमण की जल्द पहचान कर उपचार शुरू किया जा सके।

विदर्भ और आदिवासी क्षेत्रों पर आशंका खारिज
विधानसभा में चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों ने विदर्भ के कपास उत्पादक और आदिवासी इलाकों में टीबी के असामान्य प्रसार की आशंका जताई। इस पर मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों में ऐसी किसी विशेष स्थिति की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यभर में राष्ट्रीय टीबी रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत समान रूप से निगरानी और उपचार की व्यवस्था लागू है।

लातूर और अहिल्यानगर के आंकड़े चिंताजनक

जिला स्तर के आंकड़ों के अनुसार, लातूर में जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 729 नए टीबी मरीज सामने आए हैं, जबकि वर्तमान में 1,020 मरीज उपचाराधीन हैं। वहीं अहिल्यानगर जिले में वर्ष 2025 के दौरान 4,493 नए मामले दर्ज हुए थे और 92 मरीजों की मृत्यु हुई थी। जनवरी से मई 2026 के बीच जिले में 1,846 नए मामले तथा 10 मौतें दर्ज की गई हैं।

आधुनिक तकनीक से तेज हुई जांच
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने बताया कि राज्य में टीबी की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया गया है। वर्तमान में 117 एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें, 171 सीबी-एनएएटी और 746 एनएएटी मशीनें संचालित की जा रही हैं। कुल 917 उन्नत मशीनों के माध्यम से मरीजों की शीघ्र जांच, सटीक निदान और त्वरित उपचार संभव हो रहा है।

उन्मूलन अभियान को मिल रही गति
सरकार के अनुसार, नियमित स्क्रीनिंग, सक्रिय मरीज खोज, पंजीकरण और उपचार की रणनीति के कारण टीबी उन्मूलन अभियान को गति मिली है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक मरीजों की शुरुआती चरण में पहचान कर संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना और राज्य को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में प्रभावी प्रगति करना है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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