37 लाख के 11 इनामी माओवादियों ने नारायणपुर में किया सरेंडर, नक्सलवाद को फिर लगा तगड़ा झटका

नारायणपुर: बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित नारायणपुर में सुरक्षाबलों को एक बड़ी और निर्णायक कामयाबी मिली. पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान से प्रभावित होकर बुधवार 3 बजे 11 हार्डकोर माओवादियों ने हिंसा का रास्ता हमेशा के लिए छोड़ दिया. आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों में 5 महिला नक्सली भी शामिल हैं. आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों पर कुल 37 लाख का इनाम घोषित था।.
37 लाख के 11 इनामी माओवादियों का सरेंडर
साल 2025 में अब तक जिले में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों का आंकड़ा 298 तक पहुंच गया है, जो बस्तर में बदलाव की एक नई तस्वीर पेश कर रहा है. पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुड़िया ने कहा कि हम माओवाद को खत्म करने की लड़ाई में निर्णायक दौर में पहुंच गए हैं. सरेंडर करने वाले माओवादियों को हम शासन की वो तमाम सुविधाएं दे रहे हैं जिसके वो हकदार हैं. 50 हजार की आर्थिक मदद के साथ सरेंडर माओवादियों को स्किल डेवलपमेंट का कोर्स भी कराया जा रहा है
पुलिस अधीक्षक रॉबिनसन गुड़िया ने बताया कि हथियार डालने वाले 11 नक्सलियों में कई बड़े कमांडर शामिल हैं. इनमें प्रमुख रूप से मिलिट्री कंपनी के 3 सदस्य, 1 एसीएम और 7 पार्टी मेंबर शामिल हैं. सरेंडर करने वाले माओवादी लंबे वक्त से नक्सली वारदातों में शामिल रहे हैं.
सरेंडर करने वालों में कई खतरनाक माओवादियों के नाम शामिल
5 लाख के इनामी एरिया कमेटी मेंबर सियाराम सलाम और 1 और 2 लाख के इनामी सदस्यों ने भी मुख्यधारा का दामन थामा.
आत्मसमर्पण की मुख्य वजह
माओवादियों द्वारा आत्मसमर्पण के पीछे का मुख्य कारण माड़ और नारायणपुर जिले में तेजी से हो रहे विकास कार्य हैं. पुलिस के अनुसार अंदरूनी क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण और बुनियादी सुविधाओं की पहुंच से इनका विकास के प्रति रुझान बढ़ा.अति संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कैम्पों की स्थापना से सरेंडर का मन इन माओवादियों ने बनाया.
सरेंडर करने वाले सभी माओवादी माड़ डिवीजन और जीआरबी (GRB) डिवीजन क्षेत्र में सक्रिय थे, लेकिन अब विकास और शांति की ओर आकर्षित होकर समाज से जुड़ गए हैं.
तत्काल सहायता और पुनर्वास का बंदोबस्त शासन ने किया
आत्मसमर्पण के तुरंत बाद, सभी 11 माओवादियों को प्रोत्साहन राशि के रूप में 50-50 हजार का चेक प्रदान किया गया. इसके साथ ही, उन्हें छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल उन्मूलन नीति के तहत मिलने वाली अन्य सभी सुविधाओं और पुनर्वास लाभों का आश्वासन दिया गया.
आईजी और एसपी ने बढ़ाया जवानों का हौसला
पुलिस अधीक्षक रॉबिनसन गुड़िया ने बताया कि वर्ष 2025 में अब तक 298 माओवादी कैडर हिंसा त्याग चुके हैं, जो क्षेत्र में बढ़ते विश्वास और शांति का प्रतीक है.
बस्तर आईजी सुन्दरराज पी. ने इसे माओवादी विचारधारा के अंत का संकेत बताया है. बस्तर आईजी ने कहा कि लोग अब शांति और गरिमा का जीवन चुन रहे हैं, और प्रशासन उनके पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
माड़ डिविजन में आएगी शांति
नारायणपुर में एक ही दिन में 37 लाख के इनामी नक्सलियों का आत्मसमर्पण यह स्पष्ट करता है कि लाल आतंक के गढ़ माने जाने वाले ‘माड़’ क्षेत्र में अब सुरक्षा बलों की पकड़ मजबूत हो रही है. विकास कार्यों की रफ़्तार और सटीक पुनर्वास नीति के चलते नक्सली संगठन खोखला होता जा रहा है. 2025 में सरेंडर का बढ़ता ग्राफ बस्तर में स्थायी शांति की उम्मीदों को और पुख्ता करता है. माओवादियों के सरेंडर के वक्त आईटीबीपी (ITBP), बीएसएफ (BSF) और जिला पुलिस बल के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें एएसपी अजय कुमार, एएसपी सुशील कुमार नायक और अर्धसैनिक बलों के कमांडेंट शामिल थे.









