शव दफनाने को लेकर आदिवासी-ईसाई समुदाय भिड़े:कांकेर में कब्र से लाश निकालने की कोशिश, झड़प में कई ग्रामीण घायल, पुलिसकर्मियों को भी आई चोटें

कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र के बड़े तेवड़ा गांव में शव दफनाने को लेकर आदिवासी और धर्मांतरित समुदाय के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस घटना में एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए, जिनमें कुछ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

विवाद तब शुरू हुआ जब गांव के सरपंच रजमन सलाम के पिता चमरा राम की मृत्यु के बाद उनका शव गांव में ही दफना दिया गया। सरपंच के परिवार ने धर्म परिवर्तन किया था, जिससे ग्रामीण आक्रोशित थे।

पिछले दो दिनों से ग्रामीण शव को कब्र से बाहर निकालने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। यह प्रदर्शन मंगलवार (16 दिसंबर) को हिंसक हो गया, जब ग्रामीण शव को कब्र से बाहर निकालने पहुंचे और उनकी ईसाई समुदाय के लोगों से झड़प हो गई।

जिसमें कई लोग घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए आमाबेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। झड़प में कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

गांव को किया गया सील

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग-अलग क्षेत्रों में रखा है और गांव को पूरी तरह सील कर दिया है। बाहरी व्यक्तियों का गांव में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है।

गांव में अभी भी तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर रखी है। देर शाम तक दोनों पक्ष अपने समर्थकों के साथ बैठक कर रहे थे, और पुलिस तथा प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।

दफन किए शव को बाहर निकालने पर अड़े- ग्रामीण

आमाबेड़ा थाना अंतर्गत बड़े तेवड़ा में धर्मांतरित सरपंच के पिता के शव दफन का मामला 16 दिसंबर की सुबह से गरमाया हुआ है। शव दफन की बात को लेकर आदिवासी समाज और धर्मांतरित समाज दोनों आमने सामने हो गए।

अब मामला इतना बिगड़ गया है की पुलिस बल तैनात होने के बाद भी लाठी डंडा चलाया जा रहा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि गांव में अंतिम संस्कार को लेकर वर्षों से चली आ रही सामाजिक परंपराएं और प्रशासनिक नियम हैं, जिनका इस मामले में पालन नहीं किया गया।

गांव की सहमति के बिना शव को दफन करवा दिया। इससे न केवल सामाजिक सौहाद्र प्रभावित हुआ है, बल्कि गांव में तनाव और असंतोष भी फैल गया है।

सरपंच पर दादागिरी का आरोप

ग्रामीणों ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। ग्रामीण ने बताया कि गांव के सरपंच रजमन सलाम के पिता का देहांत होने के बाद उसके शव को सुबह लगभग 7 बजे दफनाया गया। सरपंच अपने मूल धर्म से बाहर होकर दूसरे धर्म को मानता है।

नियम है कि जिस भी धर्म का मानने वाला हो उसके शव दफन के लिए एक निश्चित जगह दिया जाता है। गांव का सरपंच होने के नाते उसने दादागिरी दिखाई और गांव में ही अपने पिता के शव को दफनाया। ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासन पर संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

परंपरागत रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार की मांग पर अड़े

आदिवासी समाज के लोगों का कहना है कि जिस प्रकार शव को दफन किया गया है, वह गांव की परंपराओं और सामाजिक मान्यताओं के विपरीत है। उनका आरोप है कि बिना समाज की सहमति और परंपरागत रीति रिवाजों का पालन किए बिना शव को दफन कर दिया गया, जिसे वे स्वीकार नहीं कर सकते।

इसी कारण आदिवासी समाज के लोग दफन स्थल से शव को बाहर निकालकर परंपरानुसार अंतिम संस्कार किए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं, धर्मांतरित समाज के लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार उनके धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार किया गया है और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है।

उनका तर्क है कि उन्हें अपने धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार करने का अधिकार है और वे उसी पर अडिग हैं। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया है।

प्रशासनिक अधिकारी भी गांव पहुंचकर दोनों समाज के प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे हैं और मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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