₹1000 का लालच, दो रात का सफर और फिर बंधक बनाकर मजदूरी, अशोकनगर के 80 मजदूरों की दर्दनाक कहानी

मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले से महाराष्ट्र ले जाए गए 70 से 80 मजदूरों को बंधक बनाकर जबरन मजदूरी कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मजदूरों को काम और अच्छी कमाई का झांसा देकर दूसरे राज्य ले जाया गया, जहां करीब 15 दिनों तक उनसे बिना मजदूरी दिए काम कराया गया। मजदूरों से संपर्क टूटते ही परिजनों में हड़कंप मच गया और मामला प्रशासन तक पहुंचा।

जांच में सामने आया है कि मुंगावली तहसील के जरौली बुजुर्ग, आंक्सी चक्क और तिंसी गांवों से मजदूरों को गन्ना फैक्ट्री में काम दिलाने का भरोसा दिलाया गया। हर मजदूर को हाथ में ₹1000 दिए गए, जिससे करीब 80 लोग महाराष्ट्र जाने को तैयार हो गए। अशोकनगर से बस मंगवाई गई और मजदूरों को पहले इंदौर के पास उतारा गया, जहां से पहले से तय गाड़ियों में भरकर उन्हें दो दिन और दो रात के सफर के बाद महाराष्ट्र पहुंचाया गया।

महाराष्ट्र पहुंचते ही मजदूरों को बंधक बना लिया गया। ठेकेदार के लोग निगरानी में तैनात रहे और मजदूरों को बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। करीब 15 दिनों तक उनसे जबरन काम कराया गया, न तो मजदूरी दी गई और न ही घर लौटने दिया गया।

इस मामले में ठेकेदार रिजवान ने फोन पर बातचीत में स्वीकार किया कि उसने बस ड्राइवर, कंडक्टर और बस मालिक को 2 लाख 80 हजार रुपए यूपीआई के जरिए भेजे थे। यह बयान पूरे मानव तस्करी नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

मजदूरों से संपर्क टूटने पर परिजन मुंगावली विधायक ब्रजेन्द्र सिंह के पास पहुंचे। विधायक ने इसे मानव तस्करी का मामला बताते हुए एसपी अशोकनगर से बात की और मजदूरों को सुरक्षित रेस्क्यू कर वापस लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मजदूरों के शोषण को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और महाराष्ट्र पुलिस से समन्वय किया जा रहा है। मजदूरों की सुरक्षित वापसी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। यह मामला एक बार फिर सवाल खड़े कर रहा है कि क्या मजदूरों की तस्करी का यह कोई संगठित रैकेट है और इसमें शामिल बस मालिक, ड्राइवर, कंडक्टर और ठेकेदारों पर कब सख्त कार्रवाई होगी।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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