औरंगाबाद की डीटीओ साहिबा के वाहन का इंश्योरेंस एवं पॉल्यूशन फेल,विभाग वसूलता है आम लोगों से प्रतिदिन हजारों रुपए फाइन

औरंगाबाद : जिला परिवहन विभाग शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर वाहन चेकिंग अभियान चलाती है और ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन का पॉल्यूशन, इंसयोरेन्स, हेलमेट सहित अन्य जरूरत चीज़ो पर कार्रवाई करती है. यही नही शहर के पुरानी जीटी रोड स्थित जिला परिवहन विभाग के सामने बीबी सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया जाता है.
लाखों रुपये जुर्माना भी वसूला जाता है. लोगों को जागरूक करने और जुर्माना लगाने वाली परिवहन विभाग को खुद जागरूक होने की जरूरत है. औरंगाबाद जिला परिवहन पदाधिकारी सुनंदा कुमारी के वाहन का खुद पॉल्यूशन और इंसयोरेन्स फेल है. सड़क सुरक्षा और मोटर वाहन कानूनों का पालन सुनिश्चित कराने वाला जिला परिवहन विभाग इस बार खुद कटघरे में खड़ा नजर आ रहा है.
जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) सुनंदा कुमारी के उपयोग में रहे सरकारी वाहन बीआर-26-पीए-9303 को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं. जानकारी के अनुसार उक्त वाहन का बीमा (इंश्योरेंस) और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) दोनों ही निर्धारित अवधि से बाहर यानी फेल पाए गए हैं. इसके बावजूद वाहन का सड़कों पर नियमित संचालन होने की बात सामने आ रही है.
जब इसको व्हीकल इंफो एप से जांच की गई तो पॉल्यूशन और इंसयोरेन्स दोनों फेल पाया गया. यह मामला सिर्फ एक सरकारी वाहन के कागजात का नहीं, बल्कि नियमों के समान अनुपालन, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा सवाल है.
रोज आम लोगों का चालान, लेकिन अपने वाहन पर नियम मौन
जिला परिवहन विभाग जिले भर में प्रतिदिन सघन वाहन जांच अभियान चलाता है. बिना बीमा, बिना पॉल्यूशन, बिना फिटनेस और अन्य कागजातों की कमी पर आम नागरिकों के वाहनों का चालान काटा जाता है. कई मामलों में वाहन जब्त कर लिए जाते हैं और हजारों रुपये का जुर्माना वसूला जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब नियम तोड़ने का आरोप खुद विभाग के शीर्ष अधिकारी के उपयोग में रहे वाहन पर है, तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं है. क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए है और सरकारी वाहनों के लिए अलग पैमाना है.
मोटर वाहन अधिनियम की खुली अनदेखी
बताते चले कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत बिना वैध बीमा कोई भी वाहन सड़क पर नहीं चल सकता.बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र वाहन चलाना दंडनीय अपराध है.सरकारी और निजी वाहन के बीच कानून कोई भेद नहीं करता. नियमों के अनुसार बिना बीमा वाहन चलाने पर पहली बार में 2000 रुपये तक जुर्माना या तीन महीने तक की सजा का प्रावधान है.
बिना पीयूसी वाहन चलाने पर 1000 से 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है. यही नियम जिले के आम वाहन चालकों पर सख्ती से लागू किए जाते हैं, लेकिन जब वही नियम सरकारी वाहन पर लागू होने की बारी आती है, तो व्यवस्था सवालों के घेरे में आ जाती है.
डीटीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल
जिला परिवहन पदाधिकारी का वाहन बीआर-26-पीए-9303 के दस्तावेज फेल होने की जानकारी सामने आने के बाद डीटीओ कार्यालय की आंतरिक कार्यप्रणाली भी सवालों में है. जानकारों का कहना है कि हर सरकारी वाहन के कागजात की समय-समय पर समीक्षा और नवीनीकरण की जिम्मेदारी विभागीय स्तर पर तय होती है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि वाहन के कागजातों की नियमित मॉनिटरिंग नहीं की गई है. सूत्रों की माने तो कई सरकारी विभागों में वाहनों के कागजात सिर्फ फाइलों तक सीमित रह जाते हैं और जमीनी स्तर पर उनकी गंभीर जांच नहीं होती.
सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा मामला
यह मामला सिर्फ कागजी औपचारिकता का नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा हुआ है. बिना बीमा वाहन दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों के मुआवजे से जुड़ा गंभीर जोखिम पैदा करता है. वहीं बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र वाहन चलना पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए खतरा है. परिवहन विभाग खुद इन मुद्दों पर जागरूकता अभियान चलाता है. ऐसे में उसी विभाग के वाहन पर नियमों की अनदेखी की खबर चिंताजनक मानी जा रही है.
सड़क परिवहन मंत्री के काफिले में दिखी डीटीओ वाहन
ज्ञात हो को रविवार को ग्रामीण विकास व परिवहन मंत्री श्रवण कुमार औरंगाबाद आये थे. ऐडीटीआर में उनका कार्यक्रम आयोजित था. जब मंत्री जी काफिले के साथ अतिथि गृह पहुंचे तो डीटीओ की वाहन भी वहां पहुंची. जब प्रभात खबर की टीम ने डीटीओ के नम्बर को व्हीकल इंफो एप पर जांच किया तो पॉल्यूशन और इंसयोरेन्स दोनों फेल दिखा. जब इसकी जानकारी चालक को हुई तो वह लजीज सबमिट करने का हवाला देने लगा और वाहन के सामने खड़ा हो गया.









