एक मेला, कई संस्कृतियां—बघौना की पहचान बना बाबा जलाल शाह उत्सव

सुल्तानपुर : सुल्तानपुर जिले की बल्दीराय तहसील के बघौना कस्बे में सदियों पुराना ऐतिहासिक मेला पूरे उत्साह के साथ चल रहा है.यह मेला हर साल 25 दिसंबर (क्रिसमस) से शुरू होता है और क्षेत्र की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है.मेले का मुख्य आयोजन बाबा जलाल शाह की मजार परिसर में होता है.
यहां दूर-दराज के इलाकों से हजारों श्रद्धालु और जायरीन पहुंच रहे हैं.मेला प्रबंधक जुबेर अहमद ने बताया कि बाबा जलाल शाह की दरगाह पर हिंदू-मुस्लिम सहित सभी समुदायों के लोग गहरी आस्था रखते हैं.यह मेला आपसी भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है. मेले में बघौना और आसपास के क्षेत्रों के अलावा पड़ोसी जिलों से भी बड़ी संख्या में दुकानदार आए हैं.
लकड़ी से बने घरेलू सामान, जैसे कुर्सियां, मेजें, दरवाजे और तख्त, यहां विशेष आकर्षण का केंद्र हैं. इसके अतिरिक्त, खिलौने, कपड़े, खान-पान और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान बेचने वाली दुकानों पर भी दिनभर भीड़ रहती है. बच्चों और युवाओं के लिए ऊंचे झूले प्रमुख आकर्षण हैं, जहां देर शाम तक लंबी कतारें देखी जाती हैं.
महिलाओं के लिए श्रृंगार सामग्री की दुकानें भी मेले की रौनक बढ़ा रही हैं.शाम ढलते ही पूरा मेला क्षेत्र रोशनी से जगमगा उठता है.सुरक्षा व्यवस्था के लिए बल्दीराय थाना प्रभारी नारदमुनि सिंह ने बताया कि मेले में शांति बनाए रखने के लिए देहली चौकी इंचार्ज के नेतृत्व में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है.दो अस्थायी पुलिस चौकियां भी स्थापित की गई हैं. प्रशासन की सतर्कता और स्थानीय लोगों के सहयोग से मेला शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है.यह मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्रीय संस्कृति और एकता का भी प्रतीक बना हुआ है.









