3000 लोगों की बस्ती, सिर्फ एक सामुदायिक शौचालय; कानपुर के संतलाल हाता में बदहाल हालात

कानपुर शहर के हर्षनगर इलाके से सटी संतलाल हाता दलित बस्ती में बुनियादी सुविधाओं का अभाव लोगों के लिए रोज़मर्रा की ज़िंदगी को मुश्किल बना रहा है। करीब 3000 की आबादी वाली इस बस्ती में आज तक घरों में शौचालय नहीं बन पाए हैं। पूरी बस्ती के लोग केवल एक जर्जर सामुदायिक शौचालय पर निर्भर हैं, जिसमें कुल 10 सीटें हैं—छह पुरुषों और चार महिलाओं के लिए।
स्थानीय लोगों के अनुसार, शौचालय की हालत बेहद खराब है। कई सीटों के दरवाजे टूटे हुए हैं और साफ-सफाई की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। महिलाओं और लड़कियों को शौच के लिए घर से बाहर जाना पड़ता है, जो खासकर रात के समय असुरक्षित साबित होता है। इस स्थिति का सामाजिक असर भी देखने को मिल रहा है, क्योंकि शौचालय की सुविधा न होने के कारण यहां के युवकों के विवाह प्रस्ताव तक टूट रहे हैं।
निवासियों का कहना है कि बस्ती में आज़ादी के बाद से अब तक सीवर लाइन नहीं डाली गई। सीवर की सुविधा न होने के कारण घरों में शौचालय बनवाना संभव नहीं हो पा रहा है। लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय उनसे वोट तो मांगे जाते हैं, लेकिन उनकी बुनियादी जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया जाता।
यह बस्ती शहर के उन इलाकों से सटी हुई है, जहां सीवर लाइन, घरेलू शौचालय और अन्य सुविधाएं आम हैं। इसके बावजूद संतलाल हाता में विकास की रफ्तार थमी हुई है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि भीड़ और खराब हालत के कारण सामुदायिक शौचालय का इस्तेमाल करना कई बार बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए भी मुश्किल हो जाता है, जिससे स्कूल और रोज़मर्रा के काम प्रभावित होते हैं।
बस्ती के लोगों को अब उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार उनकी इस गंभीर समस्या पर ध्यान देगी और जल्द ही सीवर लाइन व घरेलू शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि उन्हें सम्मान और सुरक्षित जीवन मिल सके।









