उज्जैन की साध्वी की धमतरी में हुंकार: धर्म रक्षा व देश की सैनिकों के लिए कह दी यह बड़ी बात…

धमतरी: देश की रक्षा करने वाले हमारे सैनिक, त्याग और बलिदान की भावना में, ऋषि दाधीचि की तरह ही महान हैं. दोनों का उद्देश्य निस्वार्थ सेवा है. ऋषि ने देवताओं की भलाई के लिए और जवान देशवासियों की शांति व सुरक्षा के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर देते हैं. उक्त बातें श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर महाकालेश्वर उज्जैन की नगरी से पधारी साध्वी वर्षा नागर ने छत्तीसगढ़ के वनांचल धमतरी जिले के मानस ग्राम सांकरा में आयोजित शिवमहापुराण कथा के छटवे दिन की कथा में बताई.

उन्होंने शिव तत्व की महिमा बताते हुए कहा कि हमारा शरीर भी उसी शिव का अंश है. पंचतत्व से मिलकर बना शरीर जब नष्ट हो जाता है, तो वह मिट्टी बन जाता है एवं जब उसी मिट्टी की हम शिवलिंग बनाते है तो उसे पार्थिव शिवलिंग कहते है.
देश की रक्षा करने वाले जवानों को बताया महान
साध्वी वर्षा ने कथा के दौरान देश की रक्षा करने वाले सैनिकों और ऋषि दाधीचि के बीच की महानता को कई स्तरों पर समान बताया. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दधीचि ऋषि ने लोक कल्याण के लिए स्वेच्छा से अपने शरीर की अस्थियाँ दान कर दी थीं, उसी प्रकार देश के जवान भी राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं.
सनातन धर्म की रक्षा के लिए आगे रहने का किया आव्हान
साध्वी वर्षा नागर ने कहा है कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए, अगर ज़रूरत पड़े तो शस्त्र उठाने पड़ें तो उठाएंगे, यह केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि समय की मांग है, जहाँ सनातन धर्म पर हो रहे हमलों के खिलाफ़ खड़ा होना ज़रूरी है और यह विचार सनातन परंपरा में भी है, जहाँ भगवान राम और कृष्ण ने भी धर्म की स्थापना के लिए शस्त्र उठाए थे. इसलिए धर्म की रक्षा के लिए शास्त्र और शस्त्र दोनों की ज़रूरत है, सिर्फ़ अहिंसा पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए.

आत्मरक्षा और धर्म की रक्षा: साध्वी वर्षा नागर ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए प्रतिरोध ज़रूरी है, और यह आत्मरक्षा का ही एक रूप है.

  • शास्त्र और शस्त्र का संतुलन: वर्षा नागर ने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए केवल ‘अहिंसा’ ही काफी नहीं, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर शस्त्र (ताकत) का उपयोग भी जायज़ है, जैसे हमारे आराध्यों (भगवान राम, कृष्ण) ने किया.
  • वर्तमान स्थिति: उन्होंने कहा कि आज सनातन धर्म को अभिव्यक्ति की आजादी के रूप में देखा जा रहा है, जबकि इसके खिलाफ़ हो रहे विरोधों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा, इसलिए अब सनातनी हिंदुओं को खुद आगे आना होगा.
उन्होंने श्रोता समाज को अपने-अपने संतानों को गुणवान, संस्कारवान एवं मूल्यवान बनाने की प्रेरणा दी. कथा श्रवण करने राधे राधे सत्संग परिवार से जुड़े आयोजन समिति के लोग व हजारो संख्या में श्रोतागण शिवभक्त उपस्थित थे.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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