औरंगाबाद: सोन तट पर बसे महादलित किसानों की खेती उजाड़ी, 5 हजार आबादी पर संकट

औरंगाबाद: ओबरा प्रखंड अंतर्गत डिहरा पंचायत के सोन नदी तट पर बसे तीन गांव- लबदना, अधौरा एवं नौनेर के भूमिहीन ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है. इन गांवों के अधिकांश लोग महादलित समुदाय से आते हैं, जो सोन नदी में लगभग 50–60 वर्षों से खेती करते आ रहे हैं. ग्रामीण सोन नदी के भीतर सब्जी एवं फसल की खेती कर अपने परिवार का जीवन-यापन करते हैं.
ग्रामीणों का प्रतिनिधित्व कर रहे लबदना के सामाजिक कार्यकर्ता सिद्धार्थ भारद्वाज ने बताया कि ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्ष 2013 तक विधिवत डाक (शुल्क) भरते रहे हैं, लेकिन उसके बाद डाक लेना बंद कर दिया गया. इसके बावजूद वे लगातार खेती करते आ रहे हैं. आरोप है कि बीते कुछ दिनों से बालू ठेकेदारों द्वारा फसल लगे खेतों को उजाड़कर नष्ट किया जा रहा है, जिससे भारी नुकसान हुआ है.
इस समस्या से लगभग 5,000 की आबादी प्रभावित हो रही है और करीब 500 से 1,000 परिवारों के सामने भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है. बालू घाट के ठीकेदारों के आतंक से परेशान करीब 300 की संख्या में उन तीन क्षेत्रों के ग्रामीण सोमवार को औरंगाबाद जिला समाहरणालय पहुंचे और जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा को लिखित आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई. जिलाधिकारी ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है.









