छत्तीसगढ़ की कृषि का नया अध्याय: ‘कृषक उन्नति योजना 2.0’ से मजबूत बन रहे किसान, दलहन-तिलहन से बढ़ी आय और आत्मनिर्भरता

रायपुर: छत्तीसगढ़ की धरती पर अब सिर्फ धान की खेती नहीं, बल्कि विविध और टिकाऊ कृषि का नया अध्याय लिखा जा रहा है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में BJP सरकार ने किसानों की आय और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए एक के बाद एक फैसलों की बुनियाद रखकर राज्य की कृषि नीति को पूरी तरह नए आयाम दिए हैं.

कृषक उन्नति योजना 2.0 के माध्यम से किसानों को प्रति एकड़ इनपुट सहायता प्रदान कर दलहन-तिलहन (इसमें अरहर, उड़द, मूंग, सोयाबीन और मूंगफली जैसी प्रमुख फसल शामिल है) जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है. वहीं प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत इन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने से किसानों को दोगुना लाभ और बड़ी राहत मिली है.

मार्च 2024 में शुरू हुई कृषक उन्नति योजना

छत्तीसगढ़ सरकार ने मार्च 2024 में कृषक उन्नति योजना की शुरुआत की थी. इसका मकसद बढ़ती खेती लागत को कम करना और किसानों को धान के अलावा दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों की ओर प्रोत्साहित करना है, जिससे उनकी आमदनी बढ़े और कृषि अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन सके. इस योजना के तहत किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि इनपुट्स की लागत में वित्तीय सहायता दी जाती है.

खरीफ सीजन में 425 करोड़ रुपये की मंजूरी

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद खरीफ सीजन के लिए 425 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है. जिससे करीब 50,000 मीट्रिक टन फसलों की खरीद की जाएगी. इससे छत्तीसगढ़ में फसल विविधीकरण, किसान आय की सुरक्षा और कृषि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत और समन्वित मॉडल तैयार हो रहा है.

प्रति एकड़ ₹10,000 से ₹15,351 तक सहायता

कृषक उन्नति योजना 2.0 के अंतर्गत सरकार विभिन्न फसलों के लिए किसानों को प्रति एकड़ ₹10,000 से ₹15,351 तक इनपुट सहायता प्रदान कर रही है. यह राशि फसल की किस्म और मौसम की परिस्थितियों के अनुसार निर्धारित की गई है, ताकि किसानों को उनकी वास्तविक जरूरत के मुताबिक अधिकतम लाभ मिल सके और खेती अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बन सके.

24.72 लाख किसानों को मिला सीधा लाभ

योजना के पहले चरण में उन किसानों को लाभ दिया गया, जिन्होंने खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में अपना धान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचा था. इस चरण में 24.72 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में लगभग ₹13,320 करोड़ रुपये DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे भेजे गए. यह राशि छत्तीसगढ़ की कृषि इतिहास में सबसे बड़ी प्रत्यक्ष सहायता में से एक मानी जा रही है और इससे किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने का एक पारदर्शी और प्रभावी मॉडल तैयार हुआ है.

पहले चरण की सफलता के बाद व्यापक हुआ ‘कृषक उन्नति योजना 2.0’

पहले चरण की सफलता को देखते हुए BJP सरकार ने योजना को कृषक उन्नति योजना 2.0 के रूप में और अधिक व्यापक बनाया. इस नए चरण में इसे केवल धान तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि दलहन, तिलहन, मक्का और अन्य वैकल्पिक फसलों तक विस्तारित किया गया, ताकि किसानों को अधिक विकल्प मिलें और उनकी आय के स्रोत बढ़ सकें.

दलहन-तिलहन की ओर बढ़ रहा रुझान, DBT से पारदर्शिता

योजना 2.0 के बाद छत्तीसगढ़ में किसानों का रुझान दलहन और तिलहन फसलों की ओर बढ़ा है, जिससे उनकी आय बढ़ोतरी हुई है और खेती का जोखिम कम हुआ. इस पहल से राज्य का दाल और तेलहन उत्पादन भी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है. इसके आलावा राशि सीधे DBT के जरिए किसानों के खातों में भेजी जा रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है. इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ सरकार ने 22 जिलों में 222 MSP खरीदी केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां किसानों से सीधे फसल खरीदी होगी.

खरीफ सीजन में इन फसलों का होगा उपार्जन

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ और रबी सीजन के लिए कुल 1 लाख 22 हजार मीट्रिक टन दलहन और तिलहन उपार्जन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था. इसमें खरीफ के लिए 50 हजार मीट्रिक टन और रबी के लिए 72 हजार मीट्रिक टन फसलें शामिल थीं. वर्तमान में, केंद्र ने केवल खरीफ फसलों के उपार्जन की अनुमति प्रदान की है. केंद्र से मिली स्वीकृति के तहत अरहर 21 हजार 330 मीट्रिक टन, उड़द 25 हजार 530 मीट्रिक टन, मूंग 240 मीट्रिक टन, सोयाबीन 4 हजार 210 मीट्रिक टन और मूंगफली 4 हजार 210 मीट्रिक टन का उपार्जन किया जाएगा. इन फसलों के उपार्जन पर कुल 425 करोड़ रुपए खर्च होंगे. केंद्र सरकार ने मांग आने पर सोयाबीन और मूंगफली के लिए अतिरिक्त स्वीकृति देने का आश्वासन भी दिया है.

MSP दरें पहले ही घोषित

भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए अरहर का समर्थन मूल्य 8000 रूपए प्रति क्विंटल, मूंग का 8768 रूपए, उड़द का 7800 रूपए, मूंगफली का 7800 रूपए, सोयबीन का प्रति क्विंटल 5328 रूपए घोषित किया गया है.

सरकार ने लॉन्च किया ‘तुहर टोकन’ ऐप

छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल की है. अब किसानों को मंडियों में लंबी कतारों में खड़ा होने की आवश्यकता नहीं होगी. राज्य सरकार ने “तुहर टोकन” नामक ऐप लॉन्च किया है, जो एंड्रॉइड मोबाइल पर काम करता है. इस ऐप की मदद से किसान घर बैठे ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकते हैं और अपनी फसल आसानी से बेच सकते हैं. कृषक उन्नति योजना 2.0 के तहत, किसान अब ‘तुहर टोकन’ ऐप के माध्यम से सहकारी समितियों में सीधे धान बेच सकते हैं, जिससे फसल बिक्री की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, आसान और समय बचाने वाली बन गई है.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सोच: किसान मजबूत, तो राज्य मजबूत

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बार-बार स्पष्ट किया है कि कृषक उन्नति योजना केवल एक सामान्य सब्सिडी योजना नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के कृषि-आधारित विकास मॉडल की आधारशिला है. उनका मानना है कि जब किसान आर्थिक रूप से सशक्त होगा, तभी गांव, समाज और पूरे राज्य का समग्र विकास संभव है. इसी दृष्टि के तहत सरकार लगातार योजना का दायरा बढ़ा रही है और अधिक से अधिक किसानों तक इसके लाभ पहुंचा रही है.

कृषि के क्षेत्र में संतुलित हो रहा छत्तीसगढ़

कृषक उन्नति योजना 2.0 छत्तीसगढ़ में कृषि विकास, किसान सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में एक निर्णायक और दूरदर्शी पहल साबित हो रही है. BJP और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह योजना किसानों को धान-केंद्रित खेती से आगे बढ़ाकर दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों की ओर प्रेरित कर रही है, जिससे छत्तीसगढ़ की कृषि क्षेत्र में संतुलन, स्थिरता और समृद्धि की दिशा में अग्रसर हो रही है. छत्तीसगढ़ में दलहन-तिलहन की खेती मुख्य रूप से बलौदाबाजार, राजनांदगांव, जशपुर, कोरिया, धमतरी और दुर्ग जैसे जिलों में हो रही है.

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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