NPS निवेशकों के लिए खुशखबरी! पेंशन फंड के विकल्प बढ़े, फीस होगी कम

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS को निवेशक-अनुकूल, पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए कई बड़े सुधारों को मंजूरी दी है। इन बदलावों से सब्सक्राइबर्स को सीधा फायदा मिलेगा, चाहे वे सरकारी कर्मचारी हों, प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी हों या रिटेल निवेशक।

अब तक पेंशन फंड मैनेजमेंट का दायरा सीमित था, लेकिन नए फैसले के तहत बैंकों को भी पेंशन फंड शुरू करने की अनुमति दी गई है। इससे निवेशकों के पास अधिक विकल्प होंगे और प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवाओं में सुधार आएगा। हालांकि, यह सुविधा केवल उन्हीं बैंकों के लिए है जिनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो और जो रिजर्व बैंक के नियमों का पालन करते हों। बैंक की पात्रता का मूल्यांकन उसकी नेटवर्थ, मार्केट वैल्यू और वित्तीय मजबूती के आधार पर किया जाएगा।

NPS की गवर्नेंस को मजबूत बनाने के लिए ट्रस्ट बोर्ड में तीन अनुभवी और भरोसेमंद नाम शामिल किए गए हैं। इनमें SBI के पूर्व चेयरमैन दिनेश कुमार खारा, UTI AMC की पूर्व वरिष्ठ अधिकारी स्वाति अनिल कुलकर्णी और डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के को-फाउंडर अरविंद गुप्ता शामिल हैं। दिनेश कुमार खारा को NPS ट्रस्ट बोर्ड का नया चेयरपर्सन भी बनाया गया है।

PFRDA ने पेंशन फंड्स की इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट फीस में बदलाव किए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। सरकारी और गैर-सरकारी निवेशकों के लिए अलग-अलग फीस संरचना तय की जाएगी। हालांकि, पेंशन फंड्स पर लगने वाली 0.015 प्रतिशत की रेगुलेटरी फीस पहले जैसी ही रहेगी।

इन सुधारों से NPS अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनेगा। ज्यादा विकल्प, बेहतर गवर्नेंस और नियंत्रित फीस का सीधा असर निवेशकों की रिटायरमेंट सेविंग्स पर पड़ेगा और उन्हें भविष्य में अधिक सुरक्षित वित्तीय स्थिति मिलेगी।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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