“इंसाफ की दहाड़! इटावा में सरेराह छात्रा से छेड़छाड़ करने वाले मोहसिन को 3 साल की कठोर सजा, कोर्ट ने कहा- ‘अक्षम्य है यह अपराध’

इटावा : बेटियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले सावधान हो जाएं! उत्तर प्रदेश की न्याय व्यवस्था अब ऐसे अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शने के मूड में नहीं है.इटावा की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने सड़क चलते किशोरी की अस्मत पर हाथ डालने वाले एक शोहदे को उसके किए की सजा सुनाते हुए सलाखों के पीछे धकेल दिया है.यह फैसला उन तमाम लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो कानून को ठेंगे पर रखकर मासूमों के हौसलों को कुचलने की कोशिश करते हैं.

​दहशत का वह मंजर: जब सरेराह हुई दरिंदगी
​यह खौफनाक वारदात 13 अक्टूबर 2023 की सुबह घटित हुई थी.कोतवाली क्षेत्र की एक 15 वर्षीय किशोरी, अपनी किताबों के साथ भविष्य के सपने संजोए स्कूल के लिए निकली थी.उसे क्या पता था कि मोहल्ले की ही गलियों में मोहसिन नाम का एक भेड़िया घात लगाए बैठा है.जैसे ही छात्रा एक सुनसान गली में दाखिल हुई, आरोपी ने सारी हदें पार करते हुए उसे दबोच लिया और उसके साथ अश्लील हरकतें (छेड़छाड़) शुरू कर दी.

​अपराधी ने मासूम की आवाज दबाने की कोशिश की, लेकिन पीड़िता ने अदम्य साहस दिखाते हुए चीखना शुरू कर दिया.छात्रा की हिम्मत के आगे वह दरिंदा टिक नहीं सका और भीड़ के डर से मौके से फरार हो गया.

​अदालत में ‘इंसाफ’ की जीत
​मामला जब कानून की चौखट पर पहुँचा, तो न्याय की देवी ने भी इस अपराध को अक्षम्य माना.विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट विनीता विमल की अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तथ्यों की ऐसी झड़ी लगाई कि आरोपी का बचना नामुमकिन हो गया.

​अपर जिला शासकीय अधिवक्ता आशीष तिवारी और विशेष लोक अभियोजक दशरथ सिंह चौहान ने पीड़िता का पक्ष इस कदर मजबूती से रखा कि बचाव पक्ष के तमाम दांव-पेच धरे के धरे रह गए. गवाहों की गवाही और पेश किए गए साक्ष्यों ने यह साबित कर दिया कि मोहसिन ने न केवल एक बच्ची के साथ बदसलूकी की, बल्कि समाज के विश्वास को भी तार-तार किया.

​3 साल की जेल: अब सलाखों में कटेगी रातें
​विद्वान न्यायाधीश ने आरोपी मोहसिन को भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए 3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई.कोर्ट के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि बेटियों की राह में रोड़ा बनने वालों का अंत केवल जेल की कालकोठरी ही है.

​फैसले का बड़ा संदेश:
यह फैसला केवल एक सजा नहीं, बल्कि उन हजारों बेटियों के लिए उम्मीद की किरण है जो हर रोज घर से बाहर कदम रखती हैं.यह समाज को बताता है कि अगर बेटियाँ शोर मचाना जानती हैं, तो हमारा कानून उन्हें न्याय दिलाना भी जानता है.

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