सीएमओ की मनमानी के खिलाफ बगावत: 15 पार्षदों का सामूहिक बहिष्कार, परिषद बैठक ठप

बलरामपुर: नगर पालिका बलरामपुर की राजनीति उस वक्त उबाल पर आ गई, जब मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के कथित तानाशाही रवैये के विरोध में सभी 15 पार्षदों ने परिषद की बैठक का सामूहिक बहिष्कार कर दिया. नतीजा- प्रस्तावित बैठक शुरू होने से पहले ही ठप हो गई और नगर के विकास से जुड़े मुद्दे अधर में लटक गए. पार्षदों का आरोप है कि सीएमओ प्रणव राय ने नियम-कायदे को दरकिनार करते हुए बैठक बुलाने की प्रक्रिया अपनाई.
नगर पालिका उपाध्यक्ष दिलीप सोनी ने सीधे-सीधे कहा कि बैठक मनमाने तरीके से बुलाई गई और परिषद की स्थायी समिति (पीआईसी) की अनिवार्य बैठक तक नहीं कराई गई. नियमानुसार पार्षदों को सात से तीन दिन पहले सूचना दी जानी चाहिए थी, लेकिन इस बार मात्र 24 घंटे पहले सूचना देकर औपचारिकता निभा दी गई. पार्षदों का कहना है कि परिषद की बैठक से पहले पीआईसी में एजेंडा तय करना पारदर्शिता का मूल आधार होता है, लेकिन इस प्रक्रिया को नजरअंदाज कर दिया गया.
प्रस्तावित बैठक में जाति प्रमाण पत्र के आवेदनों, नगर पालिका कार्यालय के रंग-रोगन, वार्ड क्रमांक 6 के चौड़ीकरण, भूतपूर्व पार्षदों के मानदेय सहित करीब 10 अहम मुद्दों पर चर्चा होनी थी. अब ये सभी विषय अनिश्चितकाल के लिए अटक गए हैं. आक्रोशित पार्षदों का आरोप है कि सीएमओ का रवैया लंबे समय से एकतरफा और आदेशात्मक रहा है, जिससे जनप्रतिनिधियों की भूमिका को दरकिनार किया जा रहा है.
उनका कहना है कि यदि जनप्रतिनिधियों की ही अनदेखी होगी तो परिषद का औचित्य क्या रह जाएगा? वहीं सीएमओ प्रणव राय ने सफाई देते हुए कहा कि परिषद की बैठक बुलाना अध्यक्ष का अधिकार है और सूचना समय पर दी गई थी. हालांकि इस बयान से विवाद और गहरा गया है. सूत्रों के मुताबिक, मामला अब नगर की सीमा से बाहर निकल सकता है. कुछ पार्षद नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव से शिकायत की तैयारी में हैं. यदि शिकायत हुई तो मामला उच्च स्तर तक पहुंचना तय माना जा रहा है.
फिलहाल, परिषद की बैठक ठप होने से नगर के विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है. सवाल यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच यह टकराव आखिर कब थमेगा, या फिर बलरामपुर की सियासत में यह टकराव आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा?











