RSS की तीन दिवसीय प्रतिनिधि सभा समालखा में शुरू, 1400 प्रतिनिधि जुटे

हरियाणा के समालखा स्थित पट्टीकल्याणा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा शुरू हो गई है.13 से 15 मार्च तक चलने वाली इस बैठक में देशभर से करीब 1400 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम, संगठन विस्तार और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक आज हरियाणा के समालखा स्थित पट्टीकल्याणा के माधव सृष्टि परिसर में शुरू हो गई. बैठक का शुभारंभ सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने किया. ये बैठक 13 से 15 मार्च तक चलेगी, जिसमें देशभर से करीब 1400 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है. बैठक की शुरुआत में अलग-अलग क्षेत्रों के दिवंगत दिग्गजों को श्रद्धांजलि दी गई. इसके बाद सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संघ का वार्षिक रिपोर्ट कार्ड पेश किया. सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने पत्रकारों को बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में चल रहे कार्यक्रमों को समाज से अच्छा फीडबैक मिल रहा है. उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष के तहत संगठन विस्तार और समाज की सज्जन शक्ति को सामाजिक सद्भाव और समरसता के लिए संगठित करना प्रमुख लक्ष्य है. उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों की शुरुआत 2 अक्टूबर 2025 को नागपुर में हुई थी, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद भी शामिल हुए थे.
10 करोड़ घरों तक पहुंचा गृह संपर्क अभियान
सी.आर. मुकुंद के मुताबिक, शताब्दी वर्ष के तहत चल रहे गृह संपर्क अभियान के जरिए अब तक देश के 37 प्रांतों में लगभग 10 करोड़ घरों और 3.9 लाख गांवों तक पहुंच बनाई जा चुकी है. इस अभियान के तहत स्वयंसेवकों ने बिना किसी पूर्वाग्रह के विभिन्न वर्गों और समुदायों के परिवारों से संवाद किया. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केरल में 55 हजार से अधिक मुस्लिम और 54 हजार से अधिक ईसाई परिवारों से संपर्क किया गया, जहां परिवारों ने स्वयंसेवकों का स्वागत किया.
देशभर में 37 हजार से अधिक हिंदू सम्मेलन
रिपोर्ट के अनुसार, देश में अब तक 37,048 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें करीब साढ़े तीन करोड़ लोगों ने भाग लिया. इन सम्मेलनों में सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, परिवार व्यवस्था, स्वदेशी भावना और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता जैसे ‘पंच परिवर्तन’ का आह्वान किया गया. संघ के संगठनात्मक विस्तार का उल्लेख करते हुए बताया गया कि पिछले वर्ष 51,740 स्थानों पर 83,129 शाखाएं संचालित थीं, जो अब बढ़कर 55,683 स्थानों पर 88,949 हो गई हैं. यानी एक वर्ष में 3,943 नए स्थान जुड़े और शाखाओं की संख्या में 5,820 की वृद्धि हुई.
नक्सल क्षेत्रों में शांति प्रयासों का स्वागत
मुकुंद ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास के लिए सरकार के प्रयासों का स्वागत किया. साथ ही मणिपुर में शांति बहाली को संतोषजनक बताया. उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू समाज की स्थिति पर चिंता भी व्यक्त की. संघ के अनुसार शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम अक्टूबर 2026 तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जारी रहेंगे.











