हां, SC/ST एक्ट का दुरुपयोग होता है लेकिन रेयर… जस्टिस गवई के बयान और आंकड़ों से समझिए पूरी कहानी

SC/ST एक्ट यानी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को लेकर एक बार फिर बहस तेज है. पूर्व CJI बीआर गवई ने कहा है कि उन्होंने इस कानून के दुरुपयोग के मामले देखे हैं, लेकिन ऐसे मामले बहुत कम हैं. सिर्फ दुरुपयोग के आधार पर इस कानून को खत्म नहीं किया जा सकता. एक टीवी इंटरव्यू में जस्टिस गवई ने कहा कि अगर कानून का गलत इस्तेमाल हो रहा है तो उसे खत्म करने के बजाय ऐसा रास्ता खोजा जाना चाहिए, जिससे झूठी शिकायत करने वालों को रोका जा सके.

जस्टिस गवई के मुताबिक, संसद कानून में बदलाव करके झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान कर सकती है. उनका यह बयान IIT बॉम्बे के एक छात्र की आत्महत्या के मामले के बीच आया है. इस मामले में एक प्रोफेसर के खिलाफ SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. हालांकि, जस्टिस गवई ने इस मामले पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि किसी चल रहे मामले पर टिप्पणी करने से वह मामला मीडिया ट्रायल में बदल सकता है.

कानून खत्म करने की बात क्यों नहीं?

जस्टिस गवई ने समझाया कि किसी भी कानून का कुछ मामलों में गलत इस्तेमाल होना उसे असंवैधानिक नहीं बना देता. जस्टिस गवई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही SC/ST एक्ट के प्रावधानों को वैध मान चुका है. उन्होंने यह भी साफ किया कि SC/ST एक्ट में FIR दर्ज होने का मतलब हर मामले में अपने आप गिरफ्तारी होना नहीं है. अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि कानून का इस्तेमाल उसे परेशान करने के लिए किया गया है तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है और अदालत उसे सुरक्षा दे सकती है.

अब आंकड़े क्या कहते हैं?

जस्टिस गवई के बयान को समझने के लिए NCRB के आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 30 जुलाई 2026 को राज्यसभा में 2020 से 2024 तक SC/ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों और उनके नतीजों के आंकड़े रखे. ये आंकड़े NCRB की रिपोर्ट से लिए गए हैं.

2023 में मामले दर्ज 53,372 तक पहुंच गए, जो इन पांच सालों में सबसे ज्यादा थे. 2024 में संख्या घटकर 48,669 हुई. वहीं दोषसिद्धि के मामलों की संख्या 2024 में 5,192 रही, जो पांच साल में सबसे ज्यादा थी.

गिरफ्तारियों और दोषी ठहराए गए लोगों का क्या आंकड़ा है?

2020 में इस कानून के तहत 61,925 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. इनमें 75,238 लोग चार्जशीट किए गए और 4,855 लोग दोषी ठहराए गए. 2021 में गिरफ्तारियां करीब 58,700 रहीं और 5,141 लोग दोषी ठहराए गए. 2022 में करीब 65 हजार गिरफ्तारियां हुईं और दोषी ठहराए गए लोगों की संख्या करीब 9,070 रही. 2023 में 61,747 गिरफ्तारियां और 7,858 दोषी रहे.

2024 में गिरफ्तारियों की संख्या घटकर 55,286 रही, लेकिन दोषी ठहराए गए लोगों की संख्या बढ़कर 10,839 हो गई, जो पांच साल में सबसे ज्यादा थी और 2020 के 4,855 से दोगुने से भी ज्यादा है. इस साल ट्रायल में पेंडिंग केसेज की संख्या भी बढ़कर 2,87,694 हो गई.

जस्टिस गवई का दूसरा बड़ा बयान- SC/ST में क्रीमी लेयर

जस्टिस गवई ने SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर को लेकर अपनी पुरानी राय भी दोहराई. 2024 में State of Punjab vs Davinder Singh मामले में सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ ने SC के भीतर उप-वर्गीकरण को 6:1 के बहुमत से मंजूरी दी थी. जस्टिस गवई ने भी इस फैसले में SC/ST के लिए क्रीमी लेयर के सिद्धांत का समर्थन किया था. उनका कहना है कि जो लोग आरक्षण का लाभ लेकर सामाजिक-आर्थिक रूप से काफी आगे पहुंच चुके हैं, उन्हें लगातार आरक्षण का लाभ मिलता रहना सामाजिक और आर्थिक न्याय के उद्देश्य के अनुरूप नहीं है. उन्होंने कहा कि इस राय के लिए उनके समुदाय के लोगों ने उनकी काफी आलोचना भी की.

जस्टिस गवई के बयान और NCRB के आंकड़ों को साथ रखकर देखें तो तस्वीर यह है कि SC/ST एक्ट के तहत मामले बड़ी संख्या में दर्ज हो रहे हैं, लेकिन उपलब्ध आंकड़े अपने आप यह साबित नहीं करते कि इनमें से कितने मामले झूठे या कानून के दुरुपयोग के हैं.

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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