केरलम की नई सरकार के पहले ही सत्र में शराब नीति को लेकर क्यों हो गया हंगामा? सहयोगी भी नाराज

केरलम में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार सत्ता में आने के एक महीने के बाद ही अपनी शराब नीति को लेकर विवादों में आ गई है. मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के कम अल्कोहल वाली शराब पर टैक्स कम करने के फैसले को लेकर विपक्ष के साथ-साथ कई सहयोगी दल भी हमलावर हो गए हैं. यही नहीं सत्तारुढ़ गठबंधन के ही कुछ घटक दल और धार्मिक नेताओं की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.
यह ताजा विवाद UDF सरकार की ओर से पेश किए गए 026-27 के रिवाइज्ड बजट के एक प्रावधान को लेकर है, जिसमें 20% तक अल्कोहल वाली शराब पर बिक्री कर यानी Sales Tax में काफी कमी कर दी गई है. संशोधित बजट पेश करते हुए, मुख्यमंत्री सतीशन, जिनके पास वित्त विभाग भी है, ने ऐलान किया कि कम अल्कोहल वाली शराब पर अल्कोहल की मात्रा के आधार पर 120% और 175% टैक्स लगाया जाएगा. जबकि वर्तमान में, राज्य में सभी भारतीय निर्मित विदेशी शराब (Indian-made foreign liquor, IMFL) पर 251% टैक्स लग रहा है.
शराब में भारी भरकम टैक्स में भारी कटौती
अब नए प्रावधानों के तहत 20 फीसदी तक अल्कोहल वाले उत्पादों को कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों के रूप में रखा गया है. राज्य में वर्तमान समय में बेची जाने वाली अधिकांश शराब, जिसमें व्हिस्की, रम और ब्रांडी शामिल हैं, में लगभग 42% अल्कोहल होता है और उन पर 251% का भारी भरकम टैक्स लगता है.
बजट दस्तावेजों के अनुसार, 0.5% से 10% अल्कोहल (v/v) वाले उत्पादों पर 120% सेल्स टैक्स लगेगा, जबकि 10% से अधिक और 20% (v/v) तक अल्कोहल वाले उत्पादों पर 175% सेल्स टैक्स लगेगा. अल्कोहल की क्षमता को v/v (वॉल्यूम बाय वॉल्यूम) के रूप में मापा जाता है, जो पेय पदार्थ में शुद्ध अल्कोहल के अनुपात को दर्शाता है. उदाहरण के लिए, 10% अल्कोहल (v/v) वाले पेय में हर 100 मिलीलीटर पेय में 10 मिलीलीटर शुद्ध अल्कोहल होता है.
आखिर टैक्स में क्यों करनी पड़ी कटौती
राज्य सरकार का टैक्स में कटौती पर कहना है कि यह फैसला कोई नई नीतिगत पहल नहीं है, बल्कि पिछली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार के तहत शुरू किए गए बदलावों को ही आगे बढ़ाया जा रहा है.
आबकारी मंत्री लिजू ने भी दोहराया कि 0.5% से 20% अल्कोहल वाले उत्पादों को कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों के रूप में शामिल करने का काम पिछली LDF सरकार ने शुरू किया था. जबकि इस संशोधित बजट में कहा गया है कि टैक्स में बदलाव का मकसद इस श्रेणी के उत्पादों पर लागू टैक्स ढांचे में सुधार लाना है. आबकारी नीति केरल की एक सालाना नीति है जो राज्य में शराब के उत्पादन, बिक्री, वितरण और टैक्स से जुड़े नियमों को तय करती है.
साल 2022-23 की आबकारी नीति के तहत, तत्कालीन LDF सरकार ने विदेशी शराब के नियमों में बदलाव किया था ताकि 0.5% से 20% अल्कोहल (वॉल्यूम के हिसाब से) वाली शराब (बीयर और वाइन को छोड़कर) को “कम अल्कोहल वाले पेय” के तौर पर वर्गीकृत किया जा सके. इस बदलाव का मकसद ऐसे उत्पादों के उत्पादन और बिक्री के लिए एक रेगुलेटरी ढांचा बनाना था, जिसमें स्थानीय स्तर पर मिलने वाले फलों, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों से बने पेय भी शामिल थे. हालांकि उस समय यह कैटेगरी तो शुरू कर दी गई थी, लेकिन इसके लिए कोई अलग टैक्स स्ट्रक्चर तय नहीं किया गया था.
फैसले से UDF के अंदर आलोचना क्यों?
माना जा रहा है कि सतीशन सरकार की ओर से पेश किए गए इस संशोधन से सत्ताधारी गठबंधन के कुछ घटक दल भी चौंक गए हैं. आबकारी मंत्री एम. लिजू ने कहा कि टैक्स से जुड़ा फैसला सरकार का प्रशासनिक फैसला है और केरल में ऐसे ‘कम अल्कोहल वाले पेय’ बेचे जाने चाहिए या नहीं, यह नीतिगत स्तर का फैसला है जिस पर UDF ने अभी तक कोई चर्चा नहीं की है.
खबरों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सतीशन को केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के पूर्व अध्यक्ष वी.एम. सुधीरन का कड़े शब्दों वाला एक पत्र भी मिला है. ओमन चांडी सरकार के समय शराबबंदी की वकालत करने के लिए पहचाने जाने वाले सुधीरन ने कहा कि सतीशन द्वारा घोषित टैक्स में कटौती शराब को बढ़ावा देती है और यह शराब तथा नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने के कांग्रेस के चुनावी वादे के खिलाफ है.
UDF की IUML भी फैसले से नाराज
इस फैसले से नाराज लोगों में अल्पसंख्यक समुदायों के नेता और केरल में कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) भी शामिल है. IUML के प्रमुख पनाक्कड़ सादिक अली शिहाब थंगल ने पार्टी के मुखपत्र ‘चंद्रिका’ में छपे एक लेख में सरकार से अनुरोध करते हुए कहा कि टैक्स में कटौती से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा की जानी चाहिए और उनका जल्द समाधान किया जाना चाहिए.
चर्च से जुड़े नेताओं ने भी टैक्स में कटौती की आलोचना की है. केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल के तहत टेम्परेंस कमीशन की राज्य समिति ने इसे राजस्व बढ़ाने वाला कदम बताया, जिससे युवाओं को शराब पीने की लत लग सकती है. साथ ही समिति ने यह भी चेताया कि अगर उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया गया तो वह सरकार के इस कदम का विरोध करेगी. चर्च के कई नेताओं ने यह भी कहा कि यह कहना सही नहीं है कि कम अल्कोहल वाले उत्पादों की कीमत कम करने से युवा ज्यादा नुकसानदायक नशीले पदार्थों की ओर जाने से बचेंगे.
निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश
इसी मामले पर विपक्ष भी हमलावर हो गई है. विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने आरोप लगाया है कि टैक्स में कटौती का मकसद शराब बनाने वाली एक प्राइवेट कंपनी को फायदा पहुंचाना है. विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने विधानसभा में बताया कि कर्नाटक की एक शराब कंपनी ने पहले की LDF सरकार से कम टैक्स दरों की मांग की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि UDF सरकार के इस फैसले से कंपनी बहुत ज्यादा मुनाफा कमा सकेगी.
राज्य के पूर्व आबकारी मंत्री एमबी राजेश ने भी मुख्यमंत्री सतीशन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. आलोचनाओं के बीच सरकार ने इन बातों को खारिज कर दिया है कि यह कदम किसी बड़े नीतिगत बदलाव का संकेत है.











