बीमा क्लेम खारिज करना पड़ा महंगा, देने होंगे 10.40 लाख:एक्सीडेंट में हुई थी ट्रक मालिक की मौत, पत्नी ने किया था दावा

बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज करना महंगा पड़ गया। जालोर कंज्यूमर कोर्ट ने कंपनी का फैसला गलत माना। इंश्योरेंस कंपनी को मृतक ट्रक मालिक के परिजनों को 10.40 लाख रुपए देने का आदेश दिया है।

दरअसल, एक्सीडेंट में ट्रक मालिक की मौत के बाद उसकी पत्नी ने बीमा क्लेम के लिए दावा किया था। कंपनी ने एफआईआर दर्ज कराने में देरी और ड्राइविंग लाइसेंस पेश नहीं करने का हवाला देकर क्लेम खारिज कर दिया था।

सांचौर तहसील के राजीव नगर पुर निवासी ट्रक मालिक पीराराम की 18 सितंबर 2018 को रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। पत्नी मेनकादेवी ने पति की मौत के बाद बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम पेश किया, लेकिन कंपनी ने 29 जुलाई 2019 को दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया। कहा गया कि दुर्घटना की एफआईआर दर्ज कराने में देरी हुई थी और ड्राइविंग लाइसेंस भी प्रस्तुत नहीं किया गया। इन्हीं कारणों का हवाला देकर बीमा कंपनी ने 10 लाख रुपए के बीमा क्लेम का भुगतान करने से इनकार कर दिया।

कंज्यूमर कोर्ट पहुंची ट्रक मालिक की पत्नी

ट्रक ड्राइवर पीराराम की पत्नी मेनकादेवी ने चोला मंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और इंडसइंड बैंक के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। बताया- पीराराम ने साल 2016 में ट्रक खरीदा था। इस दौरान 10 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा कराया था। जिसके लिए 4,344 रुपए का प्रीमियम जमा कराया था। एक्सीडेंट में मौत बाद इंश्योरेंस कंपनी में बीमा राशि के लिए दावा किया था।

आयोग ने माना- सेवा में कमी, 10.40 लाख देने के आदेश

मामले की सुनवाई के दौरान जिला उपभोक्ता आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी द्वारा इन आधारों पर क्लेम निरस्त करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। इसके बाद आयोग ने कंपनी को मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपए का बीमा क्लेम भुगतान करने के साथ मानसिक संताप और परिवाद व्यय के रूप में 40 हजार रुपए अतिरिक्त देने के आदेश दिए।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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