सड़क बनी ‘तालाब’, बीच सड़क पर बैठकर नहाने लगा ग्रामीण: CM से लगाई गुहार-‘उग्र आंदोलन के लिए मजबूर मत कीजिए’, 3 दिन से आमरण अनशन जारी

जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ क्षेत्र स्थित डोंगा-कोहरौद में सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का आमरण अनशन मंगलवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। सोमवार देर शाम एक अनशनकारी की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि आंदोलन के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम भी समय पर मौके पर नहीं पहुंची।

इधर, मंगलवार को लगातार हो रही बारिश के बीच ग्रामीणों ने बदहाल सड़क और जलभराव के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी सड़क पर भरे पानी में उतर गए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि वर्षों से सड़क की बदहाली झेलने के बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।

बारिश में भी नहीं रुका आंदोलन

मंगलवार सुबह से क्षेत्र में लगातार बारिश होती रही। तेज बारिश और खराब मौसम के बावजूद आंदोलनकारी धरना स्थल से नहीं हटे। ग्रामीण पानी से लबालब भरी सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करते रहे।

उनका कहना है कि हर साल बरसात में यही स्थिति बनती है। सड़क पर इतना पानी भर जाता है कि वह सड़क कम और तालाब ज्यादा दिखाई देती है। इससे लोगों का आवागमन बाधित होता है और आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

बीच सड़क पर बैठकर नहाया ग्रामीण, VIDEO वायरल

आंदोलन के दौरान एक ग्रामीण ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वीडियो में ग्रामीण पहले ऐसे चलता हुआ दिखाई देता है, जैसे वह रोज की तरह सुबह तालाब में स्नान करने जा रहा हो। लेकिन तालाब की ओर जाने के बजाय वह गांव के बीचोबीच जलभराव वाली सड़क पर पहुंच जाता है।

सड़क पर जमा पानी में बैठकर वह नहाना करना शुरू कर देता है। वीडियो में वह कहता है “मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी और मंत्री ओपी चौधरी जी देखिए हमारे गांव की सड़क तालाब बन चुकी है। मैं इसी सड़क पर नहाकर इस वीडियो के माध्यम से अपना विरोध दर्ज करा रहा हूं। हमें उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर मत कीजिए।”

यह वीडियो इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है।

15 वर्षों से बदहाल है पांच किलोमीटर की सड़क

ग्रामीणों के अनुसार, डोंगा-कोहरौद से बलौदाबाजार मार्ग का लगभग पांच किलोमीटर हिस्सा पिछले 15 वर्षों से जर्जर अवस्था में है।

बरसात के मौसम में सड़क पूरी तरह जलमग्न हो जाती है। बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क तालाब जैसी दिखाई देती है। इससे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानी होती है, वहीं हादसों का खतरा भी लगातार बना रहता है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।

लिखित आश्वासन मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन

आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रशासन सड़क निर्माण को लेकर लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक आमरण अनशन और आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। इस बार वे केवल मौखिक आश्वासन पर आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।

अनशनकारी बोले- टेंट टूट गया, फिर भी डटे हैं

आमरण अनशन पर बैठे स्थानीय युवक चौबे ने बताया कि 29 जून से गांव के 10 लोग सड़क निर्माण की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे साथ गांव की माताएं, बहनें और सभी ग्रामीण आंदोलन में शामिल हैं। मंगलवार सुबह से लगातार बारिश हो रही है। आंधी-तूफान में हमारा टेंट भी टूट गया, लेकिन हमने आंदोलन जारी रखा। इसके बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई हालचाल लेने तक नहीं आया। न कोई जवाब मिला और न ही किसी अधिकारी ने बातचीत की। यही शासन-प्रशासन का रवैया है।”

एक अनशनकारी अस्पताल में भर्ती

सोमवार देर शाम आमरण अनशन पर बैठे एक ग्रामीण की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार जारी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम समय पर नहीं पहुंची। उनका कहना है कि यदि आंदोलन लंबा चलता है और प्रशासन ने जल्द पहल नहीं की तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब पूरे क्षेत्र की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन सड़क निर्माण को लेकर कोई ठोस निर्णय लेता है या आंदोलन आने वाले दिनों में और उग्र रूप लेता है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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