हर 12 साल में क्यों बदल दी जाती है जगन्नाथ जी की प्रतिमा? जानें इसके पीछे का रहस्य

आज से आषाढ़ माह की शुरुआत हो गई है. इस माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन ओडिशा के पुरी स्थित मंदिर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है. रथयात्रा के दौरान उनके बड़े भाई बलभद्र और सुभद्रा देवी के रथ भी निकाले जाते हैं. इस साल भगवान जगन्नाथ जी का ये पावन पर्व 16 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलेगा. धार्मिक मान्यता की रथयात्रा के दौरान रथों की रस्सियां खींचने से जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं.
यही कारण है कि जगन्नाथ जी की रथयात्रा में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. जगन्नाथ जी के मंदिर के कई ऐसे रहस्य हैं, जिनके बारे में जानकर लोग चौंक जाते हैं. इन्हीं में से एक यह भी है कि हर 12 साल में इस धाम की मूर्तियों को बदल दिया जाता है. इस अनुष्ठान को ‘नवकलेवर’ कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है नया शरीर. ‘नवकलेवर’ अनुष्ठान में जगन्नाथ मंदिर में स्थापित श्री जगन्नाथ, बालभद्र, सुभद्रा देवी और सुदर्शन जी की प्रतिमा बदली जाती है.











