4 लाख रुपये से कम आय होने पर भी इन लोगों के लिए ITR भरना जरूरी, जानिए क्या कहते हैं नियम

अक्सर यह माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति की सालाना आय टैक्स छूट की सीमा से कम है, तो उसे इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, आयकर नियमों के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में 4 लाख रुपये से कम वार्षिक आय होने पर भी आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य हो सकता है।
यदि किसी व्यक्ति ने वित्त वर्ष के दौरान बड़े वित्तीय लेनदेन किए हैं, जैसे बैंक खाते में निर्धारित सीमा से अधिक नकद जमा करना, विदेश यात्रा पर अधिक खर्च करना, अधिक बिजली बिल का भुगतान करना या अन्य निर्धारित वित्तीय गतिविधियां की हैं, तो आय कम होने के बावजूद आईटीआर दाखिल करना आवश्यक हो सकता है।
इसके अलावा, जिन लोगों के वेतन या बैंक ब्याज पर स्रोत पर कर कटौती (TDS) हुई है और वे उसका रिफंड प्राप्त करना चाहते हैं, या भविष्य में होम लोन, कार लोन अथवा अन्य वित्तीय सेवाओं के लिए मजबूत आय रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं, उनके लिए भी आईटीआर दाखिल करना लाभदायक माना जाता है। निवेश से हुए पूंजीगत नुकसान (कैपिटल लॉस) को आगामी वर्षों में समायोजित करने के लिए भी रिटर्न दाखिल करना जरूरी होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आईटीआर दाखिल करने से पहले आय, बैंक खातों, निवेश और टीडीएस से संबंधित सभी जानकारियों का सही मिलान करना चाहिए। उचित आईटीआर फॉर्म का चयन करने के बाद रिटर्न दाखिल कर उसका ई-वेरिफिकेशन करना भी अनिवार्य है, तभी प्रक्रिया पूरी मानी जाती है।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कम आय होने के आधार पर यह मान लेना सही नहीं है कि आईटीआर दाखिल करने की जरूरत नहीं है। यदि कोई व्यक्ति आयकर विभाग की निर्धारित शर्तों के दायरे में आता है, तो समय पर रिटर्न दाखिल करना भविष्य की कानूनी और वित्तीय परेशानियों से बचने के साथ-साथ मजबूत वित्तीय रिकॉर्ड बनाए रखने में भी मदद करता है।











