भारतीय बल्लेबाज तो फ्लॉप हुए ही, मगर कोच गौतम गंभीर के ये फैसले भी बने हार की वजह

लगातार दूसरी बार टी20 वर्ल्ड चैंपियन बनने के कुछ ही महीनों के बाद टीम इंडिया इस फॉर्मेट में सवालों से घिरी नजर आ रही है. मार्च 2026 में वर्ल्ड कप जीतने के बाद पहली बार मैदान पर उतरी भारतीय टीम को लगातार 5 मैच में से 4 में शिकस्त मिली है, जबकि 1 रद्द हुआ है. खास तौर पर इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में जैसी शिकस्त मिली, उसने झकझोर कर रख दिया है. इस मैच में भारत की विस्फोटक बल्लेबाजी ‘टांय-टांय फिस्स’ रही थी. मगर नॉटिंघम की उस हार में बैटिंग ऑर्डर को लेकर कोच गौतम गंभीर के अजीब फैसलों ने भी इस शिकस्त में बड़ी भूमिका निभाई.
आयरलैंड से टी20 सीरीज में मिली चौंकाने वाली के बाद यही कहानी अब इंग्लैंड में भी रिपीट हो रही है. पहले टी20 तो बारिश से धुल गया लेकिन दूसरे में टीम इंडिया स्कोर डिफेंड नहीं कर पाई. वहीं नॉटिंघम में तीसरे मैच में वो सिर्फ 76 रन पर ढेर हो गई और 125 रन से हार गई. ऐसी शिकस्त से बल्लेबाजी पर सवाल उठने लाजिमी हैं क्योंकि इसमें एक से बढ़कर एक विस्फोटक बल्लेबाज हैं. मगर बल्लेबाजों की नाकामी के अलावा बैटिंग ऑर्डर में हर्षित राणा और अक्षर पटेल को प्रमोट करने के फैसले भी चौंकाने वाले रहे.
बैटिंग ऑर्डर में छेड़छाड़ बनी नुकसानदायक
भारतीय टीम ने तीसरे ओवर तक ही 3 विकेट गंवा दिए थे. ऐसे वक्त में आम तौर पर उप-कप्तान तिलक वर्मा को आना चाहिए था लेकिन कोच गंभीर ने अक्षर पटेल को प्रमोट करते हुए पांचवें नंबर पर भेज दिया. मगर ये फैसला भी काम नहीं आया और अगले ही ओवर में कप्तान श्रेयस अय्यर के साथ अक्षर पटेल भी पवेलियन लौट गए. यानि 5 ओवर में 5 विकेट गिर गए थे.
अब उम्मीद थी कि शिवम दुबे को बैटिंग के लिए भेजा जाएगा लेकिन फिर अजीबोगरीब फैसला लिया गया और टीम के एक नियमित बल्लेबाज की जगह बॉलिंग ऑलराउंडर हर्षित राणा को भेज दिया गया. बतौर लोअर ऑर्डर बल्लेबाज, हर्षित राणा के पास बैटिंग की काबिलियत है और वो आखिरी ओवर्स में तेजी से रन बटोर सकते हैं. मगर जब 5 ओवर में 52 रन पर ही 5 विकेट गिर गए हों तो शिवम दुबे जैसे बल्लेबाज को भेजना समझदारी भरा फैसला होता.
गंभीर के कंधों पर हार की जिम्मेदारी
कुल मिलाकर बैटिंग ऑर्डर से छेड़छाड़ और बल्लेबाजों के रोल को लेकर अनिश्चितता ने भी टीम इंडिया की मुश्किलें बढ़ाई है. खराब शॉट या परिस्थितियों को समझने की नाकामी का ठीकरा तो बल्लेबाजों को सिर फोड़ा जा सकता है लेकिन इस तरह के फैसलों की जिम्मेदारी सिर्फ एक शख्स के कंधों पर आती है और वो हैं हेड कोच गौतम गंभीर. जाहिर तौर पर गंभीर भी सवालों के घेरे में हैं और वर्ल्ड कप जीतने के बावजूद उनके कोचिंग के तरीकों पर संदेह किया जा रहा है.











