पीओके में विधानसभा चुनाव के बीच बढ़ा तनाव, 12 सीटों के विवाद पर 14 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में विधानसभा चुनाव सोमवार से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गए हैं। चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब पिछले दो महीनों से क्षेत्र में लगातार विरोध प्रदर्शन और हिंसक घटनाएं सामने आई हैं। हालात को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने पंजाब प्रांत से 14 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती की है। चुनाव तीन चरणों में 27 जुलाई से 10 अगस्त तक कराए जाएंगे।
पीओके विधानसभा की कुल 53 सीटों में से 45 पर प्रत्यक्ष चुनाव होते हैं, जबकि आठ सीटें महिलाओं, टेक्नोक्रेट्स और धर्मगुरुओं के लिए आरक्षित हैं। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार पहले चरण में मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान हो रहा है। दूसरे चरण में मुजफ्फराबाद डिवीजन की नौ सीटों और 12 शरणार्थी सीटों पर मतदान कराया जाएगा, जबकि अंतिम चरण में पुंछ डिवीजन की 11 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
इस चुनाव का सबसे बड़ा विवाद 12 शरणार्थी सीटों को लेकर है। ये सीटें उन लोगों के लिए आरक्षित हैं, जो 1947 और उसके बाद जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के मुख्य हिस्से में जाकर बसे थे। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार इन सीटों के जरिए पीओके की राजनीति और सरकार पर अपना नियंत्रण बनाए रखती है। संगठन इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है।
इसी मांग को लेकर पिछले दो महीनों से पीओके में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जो कई स्थानों पर हिंसक हो गए। इन घटनाओं में सुरक्षाकर्मियों समेत कई लोगों की मौत हुई। इसके बाद पाकिस्तान सरकार ने जेएएसी को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया। मौजूदा चुनाव स्थानीय लोगों के विरोध, राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों के बीच कराए जा रहे हैं।
चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात अतिरिक्त पुलिस बल में लगभग 30 प्रतिशत जवानों को हथियारों से लैस किया गया है, जबकि शेष 70 प्रतिशत कर्मियों को दंगा-रोधी उपकरणों के साथ संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है।
राजनीतिक मोर्चे पर भी मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) आमने-सामने हैं, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने मौजूदा परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई का हवाला देते हुए चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया है।
भारत ने एक बार फिर अपना स्पष्ट रुख दोहराते हुए कहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है तथा पाकिस्तान द्वारा कब्जा किया गया क्षेत्र अवैध है। भारत पीओके में कराए जा रहे इन चुनावों को मान्यता नहीं देता और क्षेत्र में जारी विरोध प्रदर्शनों को पाकिस्तान की नीतियों के खिलाफ स्थानीय लोगों के असंतोष का परिणाम मानता है।











