SC के आदेश के बाद भोपाल में 80000 दुकानों पर संकट, 5 लाख लोगों के रोजगार पर असर की आशंका

मध्य प्रदेश के भोपाल में रिहायशी इलाकों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. नियमों के विपरीत चल रहे कमर्शियल प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की स्थिति में करीब 80 हजार प्रतिष्ठान (दुकान) प्रभावित हो सकते हैं. इससे लगभग 5 लाख लोगों के रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है. दरअसल, भोपाल में करीब एक लाख से ज्यादा कमर्शियल प्रॉपर्टी होने का अनुमान है. इनमें से 60 से 80 हजार संपत्तियों में भू-उपयोग, भवन अनुमति या अन्य नियमों के उल्लंघन की बात सामने आ रही है. हालांकि वास्तविक आंकड़ा विस्तृत सर्वे के बाद ही सामने आएगा.
31 साल से नए मास्टर प्लान का इंतजार
भोपाल का मौजूदा मास्टर प्लान 1995 में लागू हुआ था और 2005 में इसकी अवधि पूरी हो गई. इसके बाद शहर का तेजी से विस्तार हुआ. नई कॉलोनियां बसीं, आबादी बढ़ी और कई प्रमुख सड़कें व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र में बदल गईं, लेकिन भूमि उपयोग में उस हिसाब से बदलाव नहीं हो सका. नर्मदापुरम रोड, कोलार रोड समेत कई इलाकों में रिहायशी क्षेत्रों के बीच बड़ी संख्या में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं.
नए मास्टर प्लान में रास्ता निकालने की कोशिश
सरकार अब नए मास्टर प्लान के जरिए इस समस्या का व्यावहारिक समाधान तलाश रही है. प्रस्तावित प्लान में 18 मीटर से ज्यादा चौड़ी सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए प्रावधान किए जाने की संभावना है. इसके साथ पार्किंग, ट्रैफिक व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं को भी ध्यान में रखा जाएगा. वहीं, सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती रिहायशी इलाकों का स्वरूप बनाए रखने और वहां पहले से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने की है. अरेरा कॉलोनी जैसे इलाकों में बाजार बढ़ने से ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या लगातार बढ़ रही है.
अब नए मास्टर प्लान पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन के साथ सरकार को कार्रवाई और रोजगार बचाने के बीच संतुलन बनाना होगा. अगर बड़ी संख्या में प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई होती है तो इसका सीधा असर कारोबार और रोजगार पर पड़ सकता है. ऐसे में नए मास्टर प्लान में व्यावहारिक समाधान निकालना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.
व्यापारियों से बातचीत
इस मामले को लेकर भोपाल के व्यापारी शनिवार को भोपाल पुलिस कमिश्नर ऑफिस पहुंचे. व्यापारियों ने कहा कि 31 साल हो गए हैं, आज तक भोपाल का मास्टर प्लान नहीं आया है, मास्टर प्लान नहीं आने के कारण आज हमारे सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदार सरकार है, आज व्यापारी परेशान हैं, हम पलायन को लेकर मजबूर हैं या फिर हमारे पास दूसरा रास्ता और अंतिम रास्ता आत्महत्या का है, क्योंकि अब हम क्या करेंगे. उन्होंने आगे कहा कि 80,000 से 1 लाख दुकानें बंद होने जा रही हैं, जिसमें 5 लाख लोगों का सीधा रोजगार चला जाएगा, ऐसे में इसका एक ही निराकरण है कि सरकार तुरंत मास्टर प्लान लागू करे.
कांग्रेस विधायक ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भोपाल के 10 नंबर मार्केट पर व्यापारियों के साथ इसे लेकर प्रदर्शन किया. आरिफ मसूद ने कहा कि व्यापारियों की मांग जायज है, सरकार की नाकामयाबी के चलते आज व्यापारी परेशान हैं, उनका रोजगार जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत ही मास्टर प्लान लागू कर व्यापारियों को राहत देनी चाहिए, यह व्यापारियों की गलती नहीं बल्कि सीधे-सीधे सरकार की गलती है कि आज तक 31 साल होने के बाद भी भोपाल को मास्टर प्लान नहीं मिल सका.
विजयवर्गीय ने CM को भेजा मास्टर प्लान का ड्राफ्ट
वहीं, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से भी व्यापारियों ने मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद विजयवर्गीय ने कहा कि हमने मास्टर प्लान का ड्राफ्ट मुख्यमंत्री मोहन यादव को भेज दिया है, अब उन्हें ही इसका फैसला करना है, जब वह आपके सामने आएं तो उनसे सवाल जरूर पूछिएगा.











