CM Vijay faces setback: परिसीमन बैठक से 37 सांसद गायब, DMK समेत कई दलों ने किया बहिष्कार

चेन्नई, 08 अगस्त 2026
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एस. जोसेफ विजय ने केंद्र की प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया और राज्य पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर शनिवार, 8 अगस्त को राज्य के सभी सांसदों की बैठक बुलाई। हालांकि, बैठक में तमिलनाडु के कुल 57 सांसदों में से केवल 20 सांसद ही शामिल हुए, जबकि 37 सांसदों ने बैठक से दूरी बनाए रखी।
बैठक में शामिल होने वाले सांसदों में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सांसद प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इनमें कांग्रेस के 12, वीसीके के 2, सीपीआई के 2, सीपीएम के 2, एमडीएमके का 1 और आईयूएमएल का 1 सांसद शामिल बताया गया है।
DMK समेत कई दलों के सांसद नहीं पहुंचे
बैठक का DMK ने पहले ही बहिष्कार करने का फैसला किया था। इसके अलावा AIADMK के 4, PMK, MNM और DMDK के 1-1 सांसद भी बैठक में शामिल नहीं हुए।
रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु के मुख्य सचिव एम. साई कुमार की ओर से 6 और 7 अगस्त को सांसदों को बैठक के लिए अलग-अलग निमंत्रण भेजे गए थे। इसके बावजूद बड़ी संख्या में सांसद बैठक में नहीं पहुंचे।
बैठक का बहिष्कार करने वाले सांसदों का आरोप है कि राज्य सरकार कावेरी जल विवाद जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए परिसीमन के मुद्दे को आगे कर रही है।
मेकेदातू परियोजना को लेकर भी विवाद
कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। हाल में कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातू परियोजना को लेकर यह मुद्दा फिर चर्चा में है। तमिलनाडु सरकार इस परियोजना का विरोध करती रही है।
मुख्यमंत्री विजय ने कावेरी विवाद को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों के बीच बातचीत का प्रस्ताव भी रखा है। वहीं, DMK का कहना है कि जब तक सरकार मेकेदातू मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाती, तब तक पार्टी इस तरह की बैठक में शामिल नहीं होगी।
DMK के एक सांसद के मुताबिक, सांसदों को बुलाने से पहले सरकार को राजनीतिक दलों के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा करनी चाहिए थी। उनके अनुसार, सांसद पार्टी के तय रुख के अनुसार ही काम करते हैं और ऐसी बैठक अनावश्यक थी।
कांग्रेस ने परिसीमन का विरोध करने की बात कही
बैठक में शामिल कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि तमिलनाडु के सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की बैठक में राज्य के अधिकारों की रक्षा को लेकर सहमति बनी है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु का संसद में प्रतिनिधित्व कम नहीं किया जा सकता। कांग्रेस किसी भी ऐसे परिसीमन का विरोध करेगी, जिससे राज्य की लोकसभा सीटों पर असर पड़े।
कार्ति चिदंबरम ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि लोकसभा की कुल 543 सीटें बरकरार रहें और तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों का प्रतिनिधित्व भी पहले जैसा बना रहे। उन्होंने बड़ी संसद को राज्य के हित में प्रभावी नहीं बताया।
परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों में पहले से चिंता जताई जाती रही है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से उन राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।











