ग्लोबल डिप्लोमेसी में भारत का पलड़ा भारी…गोर के बयान-कश्मीर पर पाकिस्तान की बौखलाहट साइड

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने और स्पेशल राज्य का दर्जा खत्म होने के बाद से इस केंद्र शासित प्रदेश में आए ऐतिहासिक और जमीनी बदलावों पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुहर लगती दिख रही है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के एक ताजा बयान ने अलगाववादियों और पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है. श्रीनगर दौरे के दौरान गोर ने दो टूक कहा है कि “जम्मू-कश्मीर बहुत खूबसूरत है और भारत का एक अभिन्न हिस्सा है.”
गोर के इस बयान के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में पाकिस्तान का प्रोपेगैंडा पूरी तरह बेनकाब हो गया है और उसका कश्मीर को लेकर देखा गया हर सपना टूटता नजर आ रहा है.
क्या कहा अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने?
श्रीनगर के दौरे पर पहुंचे अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने घाटी की खूबसूरती और वहां के हालात की तारीफ करते हुए कहा, ”यहां आना बेहद सुखद है. यह भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. मैं यहां पहली बार आया हूं. यह बेहद खूबसूरत जगह है. मैं यहां आकर और इस जगह को देखकर बेहद रोमांचित हूं. हमारी बहुत अच्छी बैठक हुई है.”
अमेरिकी राजदूत का यह बयान महज एक औपचारिक टिप्पणी भर नहीं है, बल्कि इसके गहरे कूटनीतिक मायने भी हैं. राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी माने जाने वाले किसी शीर्ष राजनयिक का खुले तौर पर कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताना यह साबित करता है कि वैश्विक महाशक्तियां अब जम्मू-कश्मीर की जमीनी सच्चाई को पूरी तरह स्वीकार कर चुकी हैं.
पाकिस्तान का स्टैंड और बौखलाहट
गोर का यह बयान पाकिस्तान के लिए बड़े झटके जैसा है. अमेरिका के इस रुख से पाकिस्तान का दशकों पुराना प्रोपेगैंडा धराशायी हो गया है. पाकिस्तान हमेशा से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर को विवादित मुद्दा बताने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अमेरिका के इस स्पष्ट रुख ने उसके दावों की हवा निकाल दी है.
इस्लामाबाद में खलबली मच गई. अमेरिकी राजदूत के इस बयान के तुरंत बाद पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी राजनयिक को तलब कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया. कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पाकिस्तान की गहरी निराशा और बौखलाहट को साफ-साफ दिखाता है.
ग्लोबल डिप्लोमेसी और भारत की मजबूत स्थिति
इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस स्थिति को कैसे देखा जा रहा है? दुनिया अब मान चुकी है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से कश्मीर में शांति, विकास और सामान्य स्थिति लौट आई है. यही वजह है कि अमेरिकी राजदूत ने घाटी में पर्यटन और अमेरिकी नागरिकों की यात्रा से जुड़े ट्रेवल एडवाइजरी की समीक्षा करने के संकेत भी दिए हैं.
भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी अहम मोड़ पर है. यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में संबंध लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं.
ग्लोबल डिप्लोमेसी में भारत का पलड़ा भारी होता जा रहा है. वैश्विक स्तर पर अब दुनिया यह मानने लगी है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और इस पर पाकिस्तान के दुष्प्रचार के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अब जगह कम होती जा रही है.











